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मौजूदा नीतियां ऑनलाइन सुरक्षित अहसास कराने में नाकाम

एशिया प्रशांत में नीति से संबंधित मुद्दों पर इंटरनेट सोसाइटी सर्वेक्षण की हाल में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक ऑनलाइन सुरक्षा एक ऐसा क्षेत्र है जिसपर नीति निर्माताओं को शीघ्र सबसे ज्यादा ध्यान देने  की जरूरत है।
सर्वेक्षण में इस पूरे क्षेत्र से तकरीबन 2000 अंतिम उपयोगकर्ताओं ने हिस्सा लिया और मौजूदा इंटरनेट नीति से संबंधित मुद्दे पर उनसे राय ली गई। अभी भी स्टेकधारकों के लिए ऐक्सेस प्राथमिक चिन्ता है पर इंटरनेट सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण बन गया है। इसने क्लाउड कंप्यूटिंग की जगह ली है और भाग लेने वालों के लिए यह दूसरा सबसे ज्यादा फॉलो किया जाने वाला विषय था। वार्षिक अध्ययन से यह सब सामने आया है। यही नहीं, 2016 के सर्वेक्षण में भाग लेने वाले 58% लोगों की राय में साइबर क्राइम एक मुद्दा है जिसपर सरकार को कार्रवाई करने की जरूरत है। इसके अलावा कनेकटिविटी (47%), डाटा प्रोटेक्शन (45%) और निजता (44%) के लिए मुद्दा है।

गुजरे साल के मुकाबले कनेक्टिविटी बेहतर हुई है — 70% ने कहा कि उन्होंने बेहतर इंटरनेट स्पीड महसूस किया है और 55% ने इंटरनेट की ग्राहकी में कमी महसूस की है—उपयोगकर्ता अपने फोकस ऑनलाइन विश्वास में लगा रहे हैं।

एशिया प्रशांत के इंटरनेट सोसाइटी के 7त्रीय ब्यूरो निदेशक रजनेश सिंह ने कहा, “इस साल के सर्वेक्षण के नतीजे बताते हैं कि इस क्षेत्र के स्टेकधारक कनेक्टिविटी और सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हैं तथा महसूस करते हैं कि इनपर सरकार को शीघ्र ध्यान देना चाहिए। श्री सिंह  ने आगे कहा,  “इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के लिए ऑनलाइन विश्वास पूरे एशिया प्रशांत में महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। यह स्पष्ट है कि लोग महसूस करते हैं कि मौजूदा नीतियां उनकी निजता तथा सुरक्षा की ऑनलाइन रक्षा करने के लिहाज से पर्याप्त काम नहीं कर रही हैं।”

ऑनलाइन विश्वास के ट्रस्ट बहुआयामी हैं और इसका पता सर्वेक्षण Tके नतीजों से लगता है। सर्वेक्षण में भाग लेने वालों के एक बड़े हिस्से (77%) ने कहा कि इंटरनेट में विश्वास बनाने के लिए यह अहम है। आधे से ज्यादा लोगों ने यह भी महसूस किया कि उपभोक्ता सुरक्षा (54%), पारदर्शिता (51%), और आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रख पाना कंटेंट, सेवा, टेक्नालॉजी और एपलीकेशन से ज्यादा महत्वपूर्ण है (45%).।
बहुत सारे लोगों का मानना है कि उनके देश में ऑनलाइन सुरक्षा से संबंधित नीतियां मोटे तौर पर उनके मानवीय और नागरिक अधिकारों के अनुकूल थीं। इस विचार का विस्तार ऑनलाइन निजता तक नहीं हुआ। सर्वेक्षण से यह खुलासा होता है कि भाग लेने वालों में 59% नहीं मानते हैं कि उनकी निजता ऑनलाइन सुरक्षित है।
इंटरनेट उपयोगकर्ता अपनी ऑनलाइन गतिविधियों पर ऑनलाइन सुरक्षा नीतियों के प्रभाव को लेकर भी शंका में थे। आधे से ज्यादा ने यह संकेत दिया कि इन नीतियों से उनका भरोसा नहीं बढ़ा है और वे नहीं मानते हैं कि इंटरनेट का सुरक्षित उपयोग संभव है। सिर्फ 34% ने माना कि मौजूदा ऑनलाइन सुरक्षा नीतियां उपयुक्त ढंग से असली खतरों तथा ऑनलाइन जोखिमों को संबोंधित करती हैं।

Source: Business Sandesh

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