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साहित्य

आज मेरा जन्मदिन है, लेकिन मेरी हालत…

अक्षरों में है अकेलापन, शब्दों में है दोस्ती, वाक्यों में है संगठन और संगठन एक ताक़त। कैसा लगा आप लोगों को मेरा परिचय, मैं हिंदी हूं, हिंदी जिसमें तुम्हारा बचपन खेला, जिसमें तुम्हारा यौवन बीता, जिसमें तुमने सपनें देखे, जिसमें तुमने प्रेम के गीत गाये। आज मेरा जन्मदिन है, लेकिन मेरी हालत सरकारी स्कूल के उस ख़ाली बस्ते की तरह …

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हिन्दी दिवस 2017: जानिए हिन्दी भाषा के बारे में कुछ रोचक तथ्य

किसी राष्ट्र की एकता व संस्कृति के शक्तिशाली बनने का माध्यम भाषा है। भाषा के उत्थान एवं प्रचार में ही पूरे राष्ट्र का कल्याण समाहित है।मातृभाषियों की सँख्या की दृष्टि से विश्व में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाओं के सन् 1998 ई. के उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार हिन्दी को तीसरा स्थान दिया गया।सन् 1997 में सैन्सस ऑफ इण्डिया का भारतीय …

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हिंदी- हिंदी करते हैं सब ,हिंदी उन्हें ना भावे

हिंदी इंग्लिश हैं दो बहना, दोनों करें लड़ाई दोनों की महिमा है अपनी फिर भी समझ ना आई।। हिंदी बोली मेरा घर है फिर तू क्यूँ है आई तुझको कोई नही पूँछता फिर क्यूँ यहाँ समाई।। इंग्लिश बोली सुन री बहना ज्यादा न इतराओ झूँठी सच्ची बातें करके मन को मत भरमाओ।। जहां तुझे न कोई जाने वहाँ काम मैं …

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हिंदी दिवस पर वीरेंद्र सहवाग हुए रन आउट, हो गए ट्रोल के शिकार

हमारे देश में हर वर्ष 14 सिंतबर का दिन हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर देश की बहुत- सी जानी मानी हस्तियों ने देशवासियों को बधाई दी है। भारत की क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी वीरेंद्र सहवाग ने ही ट्वीट करके बधाई दी, पर अपनी बधाई में वे कुछ ऐसी चूक कर बैठे कि वे …

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मेरी खिड़की पर दस्तक देतीं हैं वो…

क्या आपको पता है ,बरसने वाले बादल तर्साते क्यों हैं? वो बादल जो अपने आगमन का संदेश हमें शीतल हवाओं में घुली सौंधी-सी महक से दे जाते हैं। फिर गरजते हैं ,बुलाते हैं हमें बँद कमरों से निकलकर खुली हवा में सास लेने के लिये । और जब बरसते हैं तो ऐहसास कराते हैं हमें हमारी आज़ादी का, हमारे खोए …

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नारी हूँ, अबला नहीं

रोज़ सवेरे अखबार में हम औरतों के खिलाफ हो रहे अत्याचारों की ख़बरें बड़े – बड़े काले अक्षरों में पड़ते हैं । कभी कन्या भ्रूण हत्या तो कभी गेंग रेप, कभी कचरा पात्र में मिली नवजात तो कभी अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूझ रही एक पीडिता । ऐसे ही न जाने कितने अनगिनत वारदातें हैं जिन्हें हम …

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विश्व पर्यावरण दिवस विशेष: पर्यावरण और भारतीयता

भारतीयता सम्पूर्ण रुप से हम सभी को रक्षित करती है। उसमें प्रारम्भ से ही र्प्यावरण को अत्यन्त मुखर स्थान दिया है। हमारी संस्कृति में वृक्ष, पेड़-पौधों, जड़ी बूटियों को देवता माना गया है। पवित्र और देवतुल्य वृक्षों की एक लम्बी परम्परा भारतीयता के साथ गुंथी हुई है। भारतीयता किसी व्यक्ति विषेप से नहीं प्रकृति, र्प्यावरण सांस्कृतिक चेतना और सांस्कृतिक विरासत …

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नशे की दुनिया और उससे बचाव

मादक चीजों में आजकल नशीली दवाओं का नशा सभी प्रकार के लोगों में बढ़ता चला जा रहा है। नशीली दवाओं की बढ़ती लत पूरी पीढ़ी को समाप्त कर रही है। यह स्थिति आने वाली पीढ़ी के सामाजिक और वैयक्तिक स्वास्थ्य के लिए बडी गंभीर चुनौती है। नई पीढी नशीली दवाओं की ओर बढी तेजी से आकर्षित हो रही है। एक …

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कैसा हो पीने का पानी ?

पीने का पानी कैसा हो? इस विषय पर वैज्ञानिको ने काफी प्रयोग किये हैं और पानी की गुणवत्ता को तय करने के मापदण्ड बनाये है। पीने के पानी का रंग, गंध, स्वाद सब अच्छा होना चाहिए। शुद्ध आसुत जल पीने के योग नहीं होता है। इसी प्रकार ज्यादा केल्शियम या मैगनेशियम वाला पानी भी कठोर जल होता है और पीने …

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चन्दन: हमारी संस्कृति का अंग

आपने सुनी और पढ़ी होगी रहीम की पंक्ति “चन्दन विष व्यापत नहीे”, लिपटे रहत भुजंग,” या किसी को चन्दन – सा बदन कहकर पुकारा होगा। भारतीय संस्कृति, साहित्य चन्दन चन्द्रमा और कमल के बिना अधूरा है। क्या आपने कभी चंदन के वन की सैर की है ? रहीम दास जी क्षमा करें यहां पर कहीं भी भुजंग नहीं लेकिन चन्दन …

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