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इस बार कितना सफल होंगे अन्ना हजारे?

नई दिल्ली। ‘इंडिया अंगेस्ट करप्शन’ की मांग को लेकर 2011 में भ्रष्ट्राचार के खिलाफ लड़ाई की शुरुआत करने वाले अन्ना हजारे शुक्रवार 23 मार्च  से फिर से देश की राजधानी दिल्ली के रामलीला मैंदान में अनशन पर बैठ गए। लेकिन इस बार अन्ना लोकपाल के अलावा एक और मांग सरकार से कर रहें है।

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इस बार अन्ना लोकपाल के साथ-साथ किसानों से मुद्दों को लेकर भी रामलीलाल मैंदान में हैं।

साल 2011 में भ्रष्टाचार के खिलाफ दिल्ली के रामलीला मैंदान में आंदोलन की शुरुआत की थी। उनके इस आंदोलन में उन्हे मीडिया से साथ साथ देश की आवाम ने भी इस आंदोलन में उनका भरपूर साथ दिया था। हांलाकि उनके इस आंदोलन का असर हिंदुस्तान की राजनीति पर जमकर हुआ। उनके इस आंदोलन से देश में आम आदमी पार्टी ने देश की राजनीती में अपने अस्तित्व में आई।

हालांकि इसमें अन्ना की रजामंदी नहीं थी लेकिन दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आदोलन की राह की जगह राजनीती में उतर कर लड़ाई लड़ने का फैंसला किया। उनके इस आंदोलन का असर देश की राजनीति मे भरपूर था।

लोकपाल की मांग को लेकर अन्ना 2011 में भी रामलीला मैंदान में थे। लेकिन इसके बाद चार साल बीत जाने के बाद भी लोकपाल देश की संसद में पारित नहीं हो  सका। अब एक बार फिर से अन्ना रामलीला मैदान में है। लेकिन देश की राजनीति में थोड़ा बदलाव है। जहां पिछले आदोंलन के दौरान केंद्र में यूपीए सरकार सत्ता में काबिज थी तो वहीं इस बार केंद्र मे नरेंद्र मोदी की राजग सरकार सत्ता में काबिज है।

अन्ना फिर मैंदान में हैं लेकिन इस बार टीम पुरानी नहीं बल्कि नई है। इस बार के आदोंलन के लिए अन्ना ने फिर 20 लोगो की टीम बनाई है। अन्ना की इस टीम के देशभर से जहां लोग शामिल हैं तो वहीं इस बार उनका पुरजोर से लोकपाल को संसद में पारित और किसानों की समस्या पर सरकार से कोई ठोस कदम उठवाने की होगी।

15 जून 1937 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के निकट भिंगार के एक मराठी परिवार में जन्में अन्ना के अगर वक्तिगत जीवन की बात करें तो वे अविवाहित है। भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना की लड़ाई की शुरुआत 1991 में हुई।

भ्रष्टाचार और आम आदमी के अधिकारों के लिए अन्ना के आंदोलन और लड़ाई की बात की जाए तो इसकी लिस्ट काफी लंबी है। अन्ना ने हमेशा भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी आवाज को हमेशा बुलंद रखा जिसके चलते उन्हे मानहानि के मुकदमे के चलते जेल भी जाना पड़ा। अब अन्ना अपनी मांगो को लेकर फिर मोदी सरकार के सामने रामलीला मैदान में है और अपने आंदोलन में हजारों लोगो के समर्थन का दावा भी कर रहें है।

गौरतलब है कि पिछले आंदोलन के दौरान अन्ना को दिल्ली ही नहीं बल्कि हिंदस्तान के हर छोटे से छोट शहर साथ गांवो से भी करोड़ों लोगो का समर्थन प्राप्त हुआ था। हर भारतीय ने उनके साथ मिल कर भ्रष्टाचार की उस लड़ाई में हिस्सा लिया। अब इस बार देखना ये कि अपने इस आंदोलन से अन्ना सरकार को कहां तक अपनी मांगे मनवाने में सफल रहते हैं।

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