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जस्टिस गोगोई: न्यायपालिका को है क्रांति की जरूरत

सुप्रीम कोर्ट के सीनियर जज जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि न्यायपालिका को आम आदमी की सेवा के लिए सुधार के बजाए क्रांति की जरूरत है। उन्होंने जोर दिया कि न्यायपालिका को अधिक सक्रिय रहना होगा। वे तीन मूर्ति भवन के प्रेक्षागृह में ‘‘ न्याय की दृष्टि ’’ पर तीसरे रामनाथ गोयनका स्मृति व्याख्यान में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका सभी की उम्मीद की आखिरी किरण है और इस पर समाज का काफी विश्वास है।

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उन्होंने एक लेख का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘‘… स्वतंत्र न्यायाधीश और मुखर पत्रकार लोकतंत्र की रक्षा करने वाली अग्रिम पंक्ति हैं … . ’’ उन्होंने न्याय प्रदान करने की धीमी प्रक्रिया ऐतिहासिक चुनौती रही है। जस्टिस गोगोई ने हाल ही में हुई कुछ घटनाओं का जिक्र भी किया है। उन्होंने लिखा है कि क्या यहीं संवैधानिक नैतिकता की धारणा है जो में दिल्ली में सरकार बनाम एलजी के मामले में देखने को मिली और अब सुप्रीम कोर्ट में धारा 377 पर चल रही सुनवाई में भी देखी जा रही है।

जस्टिस गोगोई ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का रोल लगातार विकसित हुआ है। 70-80 के दशक में मूल संरचना के सिद्धांत का विस्तार हुआ और फिर 1980 में आर्टिकल 21 का और 1990 के दशक तक सुशासन न्यायालय तक एक हद तक हम पहुंचे।

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