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इसलिए खास है 42 लोकसभा सीटों वाला पश्चिम बंगाल राज्य

एनआरसी को लेकर मचे सियासी हंगामे के बीच तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लाइम लाइट में आ गई हैं। क्योंकि, एनआरसी का पश्चिम बंगाल की राजनीति से बेहद खास अटैचमेंट है। बांग्लादेश से सटे पश्चिम बंगाल राज्य में बांग्लादेशीयों के चोरी छिपे होने आने के आरोप लगते आए हैं। लेकिन, अब यह मामला सियासी तूल पकड़ता जा रहा है। बीजेपी शुरू से ही 2019 चुनाव के लिए पश्चिम बंगाल को संजीवनी बूटी मानकर चल रही है। बीजेपी हर चुनाव में वहां नंबर दो पोजीशन पर आती है। लेकिन, बीजेपी बंगाल में अपने पांव जमा नहीं पा रही है। आए दिन बीजेपी वॉलेंटियर पर हमले और हिंसा के चलते तृणमूल वहां बीजेपी के पैर उखाड़ देती है। ममता बनर्जी की सत्तारुढ़ पार्टी तृणमूल कांगे्रस के कार्यकर्ताओं के हिंसक रवैये के चलते भी बीजेपी को वहां टिकने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

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एनआरसी: दिल्ली से बंगाल तक मचे सियासी घमासान के बीच ममता ने किया बड़ा एलान

लेकिन, सबसे बड़ी बात जो है वह यह है कि ममता बनर्जी की पश्चिम बंगाल की जनता पर अच्छी पकड़ है। सीधे जनता से जुड़ाव रखने वाली ममता बनर्जी राज्य में काफी लोकप्रिय हैं। ममता बनर्जी केंद्र सरकार की मुखर विरोधी हैं चाहे नोटबंदी,आधार कार्ड हो या फिर जीएसटी जैसे हर फैसले पर ममता बनर्जी अपने विरोध का झंडा बुलंद कर देती हैं। उधर, बीजेपी चाहती है कि पश्चिम बंगाल से आने वाली लोकसभा की सीटों पर बीजेपी शुरु से ही नजर जमाए हुए है।

क्योंकि, उत्तर प्रदेश(80) महाराष्ट्र (48) के बाद पश्चिम बंगाल ऐसा राज्य है जहां से दिल्ली की सियासी गलियों का रास्ता तय होता है। पश्चिम बंगाल से लोकसभा की 42 सीटें हैं। ऐसे में बीजेपी चाहती है कि वहां अभी से सियासी जमीन तय कर 2019 चुनाव का रास्ता तय कर लिया जाए।

हालांकि, अगर एनआरसी की बात करें तो बीजेपी इसे देश की संप्रभुता का मुद्दा बता रही है। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने लोकसभा में कहा था कि यह बिल राजीव गांधी ही लाए थे लेकिन, उनमें इसे लागू करने की हिम्मत नहीं थीं। हम में वह हिम्मत है, इसलिए हमने इसे लागू किया। अब देखना यह है कि एनआसी क्या वाकई में एक राजनीतिक मुद्दा है और इसका 2019 लोकसभा चुनाव में कितना असर पड़ेगा।

लेकिन, यह बात तो तय है कि एनआरसी ने ममता बनर्जी को 2019 के साइलेंट मोड से बाहर ला दिया। अब उन्होंने खुलकर विपक्ष का साथ देने का एलान कर दिया है। उधर, बीजेपी ने एनआरसी से कई निशाने साध दिए हैं। गौरतब है कि असम चुनाव के दौरान बीजेपी ने वादा किया था असम में अगर सत्ता में आए तो एनआरसी लागू करेंगे। अब देखना यह है कि पश्चिम बंगाल में यह फॉर्मूला 2019 चुनाव में कितना कामयाब होता है।

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