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रेलवे ने बच्चों की सुरक्षा के लिए उठाया बड़ा क़दम

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) द्वारा ‘रेलवे चिल्ड्रन इंडिया’ के सहयोग से तैयार की गई ‘बच्चों के अनुकूल और रेलवे के संपर्क में आने वाले बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करने की निर्देश पुस्तिका’ का आज हैबिटेट वर्ल्ड में आयोजित एक कार्यक्रम में विमोचन किया गया। सभी रेलवे स्टेशनों पर बच्चों के अनुकूल वातावरण तैयार करने के खाके के रूप में इस पुस्तिका का उपयोग किया जाएगा।

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इसी कार्यक्रम में लोगों और हितधारकों के बीच जागरूकता/ सतर्कता बढ़ाने के लिए भारतीय रेलवे और ‘सेव द चिल्ड्रन’ के साथ विचार-विमर्श कर एनसीपीसीआर द्वारा भारतीय रेल के संपर्क में आने वाले बच्चों की सुरक्षा पर तैयार की गई सूचना शिक्षा संचार सामग्री का भी विमोचन किया गया।

रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष अश्विनी लोहानी ने बल दिया कि विपत्ति में फंसे बच्चों की देखभाल और सुरक्षा के मुद्दे पर अधिक संवेदनशीलता बरतने की आवश्यकता है। इस मुद्दे पर तुरंत जन-जागरूकता फैलाने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि रेल कर्मचारियों और कुलियों तथा विक्रेताओं सहित अन्य हितधारकों को संवेदनशील बनाने के लिए एनसीपीसीआर के सहयोग से 8 जून, 2018 से बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान शुरू किया जाएगा।

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इस अवसर पर एनसीपीसीआर की अध्यक्ष स्तुति कक्कड़ ने कहा, ‘लापता या घर के अत्याचार पूर्ण माहौल से भागकर रेलवे प्लेटफार्म पर पहुंचने वाले बच्चों की सुरक्षा की आवश्यकता है, क्योंकि अजनबिओं द्वारा उनका उत्पीड़न किए जाने का खतरा अधिक रहता है।’ बच्चों के अनुकूल और रेलवे के संपर्क में आने वाले बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करने की निर्देश पुस्तिका से रेलवे प्लेटफार्म पर बच्चों की सुरक्षा की खामियों को दूर करने में मदद मिलेगी।

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रेल पुलिस बल (आरपीएफ) के महानिदेशक धर्मेन्द्र कुमार ने बताया कि आरसीआई द्वारा प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि आरपीएफ रोजाना ऐसी गतिविधियों की निगरानी करता है और उसने पिछले 4 वर्षों में लगभग 35,000 बच्चों को बचाया है। कुमार ने विभिन्न रेलवे स्टेशनों पर चाइल्ड हेल्प डेस्क द्वारा दी जा रही सेवाओं के बारे में भी जानकारी दी।

रेलवे चिल्ड्रन इंडिया के निदेशक नवीन सेल्लाराजू ने रेलवे स्टेशनों पर बाल संरक्षण प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए सिविल सोसाइटी संगठन, एनसीपीसीआर और रेलवे को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।

अनुमान है कि देश में प्रति 5 मिनट में एक बच्चा रेलवे स्टेशन पहुंचता है। जिसके कारण वह बच्चा कई खतरों और उत्पीड़न का शिकार हो सकता है। इसलिए रेलवे स्टेशनों पर मौजूदा बाल सुरक्षा प्रणाली को सुदृढ़ करना आवश्यक है।

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2015 में भारतीय रेल, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और एनसीपीसीआर द्वारा रेलवे के संपर्क में आने वाले बच्चों की देखभाल और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रेलवे की मानक परिचालन प्रक्रिया का शुभारंभ किया गया था, जो बच्चों की सुरक्षा में पथ प्रदर्शक बना। हालांकि ऐसे कई स्टेशन हैं जहां एसओपी की शुरूआत की जानी है और यह निर्देश पुस्तिका इस कमी को पूरा करने में मददगार होगी।

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