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भारतीय न्याय व्यवस्था की असाधारण घटना..

भारत की न्यायिक व्यवस्था में एक बेहद बड़ी घटना हुई है। देश की शीर्ष अदालत यानि सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने प्रेस वार्ता बुलाकर सीजेआई यानि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के कामकाज के तरीके पर सवाल उठाए हैं। चारों जजों के इन आरोपों के बाद भारत की राजनीति में भूचाल आ गया है। प्रेस वार्ता कर आरोप लगाने वाले चारों जज जस्टिस चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ हैं। भारतीय न्याय व्यवस्था की यह एक असाधारण घटना है।

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इस बात को चारों जजों ने भी स्वीकार किया। मीडिया को संबोधित करते हुए जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा कि हम देश के सर्वोच्च न्यायिक पद पर हैं। इसके तहत हमारी राष्ट्र और न्यायपालिका के प्रति जिम्मेदारी बनती है। हमने कुछ बातें चीफ जस्टिस के समक्ष रखीं थीं लेकिन, उन्होंने हमारी कोई बात नहीं सुनी। इसलिए हमें सार्वजानिक तौर पर यह कदम उठाना पड़ा। उन्होंने इस मामले में एक खास मुद्दे का जिक्र करते हुए कहा कि हमने सीजेआई को बहुत समझाने की कोशिश की हम एक चीज को लेकर बदलाव चाहते हैं।

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इसको लेकर हमने उन्हें एक खास मकसद से हस्ताक्षरित पत्र लिखकर बताना चाहा कि किसी खास मुद्दे को सही तरीके से निर्वाह किया जाए लेकिन उन्होंने हमारी कोई सुनवाई नहीं की। चारों जजों ने कहा कि इसलिए हमें यह बात देश के सामने रखनी पड़ी। जस्टिस गोगोई ने कहा कि हमें देश का कर्ज उतार रहे हैं। चारों जजों द्वारा सीजेआई को लिखी चिट्ठी भी सार्वजानिक हो गई है। मीडिया के जरिए जो बातें निकलकर सामने आ रही है उसमें चारों जजों की नाराजगी की कई वजह बताई जा रही हैं। सीजेआई द्वारा बड़े केसों को चुनिंदा जजों की बैंच को देना। मेडिकल कॉलेज घूस मामले में सुप्रीम कोर्ट के जजों में मतभेद जैसे मुद्दे जजों में टकराव की बड़ी वजह बने हैं।

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