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नोटबंदी के बाद 300 गुना बढ़ी PAN कार्ड बनवाने वालों की संख्या, जानिए इसके फायदे

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने कहा है कि नोटबंदी के बाद से पर्मानेंट एकाउंट नंबर (पैन) बनवाने वालों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ है। सीबीडीटी ने एक बयान जारी कर कहा कि पैन कार्ड आवेदकों की संख्या में 300 गुना का इजाफा हुआ है। सीबीडीटी ने कहा कि नोटबंदी के पहले हर महीने ढाई लाख आवेदन आते थे लेकिन, नोटबंदी के बाद से यह संख्या साढ़े सात लाख पहुंच गई है। एक साल पहले सरकार ने काले धन पर अंकुश लगाने के लिए 1000-500 के नोट बंद कर दिए थे,  इसके बाद सरकार ने एक आदेश कर बैंकों में ट्रांजेक्शन के लिए पैन कार्ड भी जरूरी कर दिया था।

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दो लाख से ज्यादा का ट्रांजेक्शन वाले बैंक अकाउंट के लिए भी पैन कार्ड जरूरी हो गया है और पचास हजार से ज्यादा लेनदेन करने वाले को भी पैन कोर्ड का नंबर बताना होगा। गौरतलब है कि काले धन के खिलाफ मोदी सरकार ने बहुत सख्ती दिखाई है सरकार ने बैंको अकाउंट के लिए भी आधार कार्ड जरूरी कर दिया है जबकि आधार ओर पैन को भी आपस में लिंक अप करने के निर्देश दिए गए हैं।

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आधार और पैन लिंक करने से किसी भी प्रकार की धांधली या कर चोरी की आंशका नहीं रहेगी। आईटी भरने में भी आधार जरूरी है। आधार से जुडऩे के बाद बैंक का हर लेनदेन, टैक्स, से संबंधित हर जानकारी ऑनलाइन हो जाएगी। सिर्फ आपके आधार नंबर से आपकी पूरी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध होगी जिससे किसी प्रकार की टैक्स चोरी की आंशका नहीं रहेगी। दस डिजिट वाला पैन कार्ड आईटी रिटर्न भरने में काम आता है जो आयकर विभाग द्वारा जारी किया जाता है। आयकर से जुड़े कामों के लिए यह एक पहचान का काम करता है।

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