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आखिर ट्रंप क्यों खफा हैं नाटो के सदस्य देशों से?

ब्रसेल्स में होने जा रहे नाटो सम्मेलन से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने जर्मनी पर आरोप लगाते हुए कहा है कि जर्मनी ने रूस के साथ पाइपलाइन डील की है जिससे रूस को करोड़ों डॉलर्स का फायदा हुआ। पिछले साल भी ट्रंप ने नाटो के अन्य सहयोगियों को रक्षा खर्च में अपना सहयोग न देने को लेकर आपत्ति जताई थी। ट्रंप ने सदस्य देशों से इस रक्षा खर्च को जीडीपी के 2 प्रतिशत से बढ़ाकर दोगुना करने के लिए कहा है।नाटो का मूलतः गठन सोवियत संघ को हर क्षेत्र में रोकने के उद्देश्य से किया गया था। इसका मुख्यालय ब्रसेल्स (बेल्जियम) में है। सोवियत संघ के विघटन के बाद यह संगठन आतंकवाद से लड़ाई, पड़ोसी देशों में स्थिरता बनाए रखना, साइबर सुरक्षा आदि के लिए काम करता है। फिलहाल अमेरिका नाटो के कुल खर्च का 22 प्रतिशत देता है।

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इसके 29 में से सिर्फ 8 सदस्य देश ही ऐसे हैं जिन्होंने जीडीपी के 2 प्रतिशत खर्च देने के लक्ष्य को पूरा किया है। ट्रंप नाराज़ हैं क्यूंकि ये देश अपने रक्षा क्षेत्र पर पर्याप्त खर्च नहीं कर रहे हैं और बड़े स्तर पर अमेरिका पर निर्भर हैं। ट्रंप ने हाल ही में ट्वीट किया था,‘यूरोपीय संघ ने हमारे मजदूरों, कर्मचारियों और कंपनियों के लिए व्यापार करना मुश्किल कर दिया है और फिर भी वे चाहते हैं कि हम नाटो के जरिए उनकी सुरक्षा करते रहे। यह नहीं चलेगा।’ ट्रंप के अनुसार जर्मनी रक्षा क्षेत्र में जीडीपी का महज 1.24 प्रतिशत खर्च करता है जो तय मानक से काफी कम है।

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