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मेरी खिड़की पर दस्तक देतीं हैं वो…

क्या आपको पता है ,बरसने वाले बादल तर्साते क्यों हैं? वो बादल जो अपने आगमन का संदेश हमें शीतल हवाओं में घुली सौंधी-सी महक से दे जाते हैं। फिर गरजते हैं ,बुलाते हैं हमें बँद कमरों से निकलकर खुली हवा में सास लेने के लिये । और जब बरसते हैं तो ऐहसास कराते हैं हमें हमारी आज़ादी का, हमारे खोए हुए बचपन का ।

बच्चे, बड़े- बूढे, सभी को सावन के इस मौसम का बेसब्री से इंतजार रेहता है। तपते मौसम के बाद जब मॉनसून का ये मौसम आता है, तो लगता है बारिश की प्रत्येक बूँद अमृत बनकर हमारे जीवन को नये उत्साह से भरने और हमारे दिल की बंजर ज़मीन को महकाने हेतु ही  गिरी हो। सूरज के तप से जब पानी भाप बन उड़ता है, तो एक-एक बूँद मिलकर विशाल बादलों का रूप ले लेती है और जब नीचे गिरती है, तो केवल शीतलता का एहसास कराती है। महज़ एक बूँद ही जब फूलों की पंखुडियों पर जा गिरती है, तो उसकी खूबसूरती और निकर उठती है। महज़ एक बूँद जब किसी किसान के माथे पर गिरती है, तो उसकी हल्की -सी मुस्कान ही माथे पर बनी शिकन की जगह ले लेती है। आशा है इस कविता में सावन के इस मौसम का जो उल्लेख किया गया है वो पढ़ने योग्य हो ।

पयोधर की कुछ बूँदें 

मेरी खिड़की पर दस्तक देतीं हैं वो,
खामोशी का शीशा तोड़ने,
पर नहीँ टूटती जब वो शीशे की दीवार,
आवाज़ देते हैं गुर्राते बादल मुझे,
फिर भेजते हैं बूँदों को बरसने मुझ पर,

पर जब छूती हैं वो ज़मीन को ,
लगता है मोती की माला टूटी हो किसी की,
और बिखर गए हों मोती उसके,
समेटने जब निकले हम उन मोतियों को,
रेत की तरह फिसल गए हाथों से,
हथेलियों में जैसे टूटे बुलबुले पानी के।

कुछ गिरे फूलों की पंखुडियों पे जाकर,
किसी कलाकार की तस्वीर का हिस्सा बनने ,
कुछ सजे हुमारी पलकों पर आकर ,
हुमारे दर्द का हमदर्द बनने।

कुछ गिरे गीली माटी को महकाने,
उस हसीन मौसम को और सुहावना करने,
कुछ बनके अमृत गिरे उन पर,
उनके शुष्क लबों पर मीठी सी मुस्कान सजाने।

कुछ मिलने उतरे जलमाला के सहस्त्र मोतियों से,
उसकी बहती धारा में खुदको पिरोने,
जब वेग से गिरते हैं वो इंद्रधनुष को छूकर,
लगता है श्वेत- चीर-सी गिरी हो नभ से।

पूरी कायनात को अपनी खूबसूरती का दीवाना कर,
अपनी कुरबत से मुझे मेहरम बनाकर अपना,
जलधर की झोली में बैठ चल दिये फ़िर कहीं और,
किसी और की खिड़की पर दस्तक देने,
किसी.और को अपना मेहबूब बनाने,
वो चल दिये कहीं और…।

– श्रेया खण्डेलवाल 

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