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6 दशक में पहली बार इस टीम के बिना होगा फुटबॉल विश्वकप

आखिरकार वह हो ही गया जिसका संदेह व्यक्त किया जा रहा था। ‌फुटबाल के चैंपियन देशों का जिक्र होते ही दुनियाभर के फुटबाल प्रेमियों के दिमाग में ब्राजील के बाद अगर किसी दूसरे देश का नाम आता है तो वह है इटली। अब वही देश अगले साल रूस में होने वाले विश्वकप जैसे सबसे बड़े फुटबाल टूर्नामेंट में नहीं दिखेगा। कल रात स्वीडन के खिलाफ हुए प्लेऑफ के दूसरे चरण में उसके लिए अंतिम उम्मीद थी लेकिन बूफों की टीम मेसी जैसा पराक्रम नहीं कर पाई। कोई भी टीम गोल नहीं कर पाई। कुछ ही दिनों पहले मेसी ने लगभग इसी हालात में इक्वाडोर के खिलाफ अपनी टीम अर्जेंटीना को रूस जाना पक्का करवा दिया था लेकिन बूफों को आंसूओं के साथ मैदान से बाहर आना पड़ा। जैकॉब जोहानसन का पहले चरण में बनाया गया एकमात्र ही आखिरकार निर्णायक बना। इस तरह अब रूस में ना खेल पानेवाली टीमों में हॉलैंड के साथ इटली ने भी अपना नाम दर्ज करवा लिया।

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हार से दुखी बूफों ने तुरंत रिटायरमेंट ले लिया

कमाल की बात है कि स्वीडन ने ही हॉलैंड को भी हराकर उसे फाइनल्स तक पहुंचने ने वंचित किया था। इटैलियन फुटबाल एसोसिएशन के अध्यक्ष कार्लो टावेचिओ ने क्वालीफाई ना कर पाने को राष्ट्रीय त्रासदी करार दिया है। मैच खत्म होते ही इटली के शहर सैन सिरो में मरघट से हालात हो गए। लियानार्डो बानूकी के कंधे पर सिर रखकर रोते विश्व के सबसे बेहतरीन गोलकीपर गियानलउगी बूफों ने कहा – यह 175वां मैच मेरा अंतिम मैच है। उधर डेनियल डे रॉसी ने यह कहते हुए रिटायरमेंट घोषित कर दिया कि अब समय है कि अब अटैकिंग प्लेयर को जगह देना जरूरी है। इसी के साथ कोच वेंचुरा का कार्यकाल भी खत्म मानना चाहिए। इटली ने गेंद को 75% अपने पास रखा और गोल पर 23 बार शॉट भी लिए लेकिन एक भी बार गोल पोस्ट की सीमा पार नहीं हो पाई। सिर्फ चार बार गोल पर शॉट पा सकने वाली स्वीडन टीम के कोच ने कहा –हमें इटली के खिलाड़ियों ने आगे बढ़ने का मौका ही नहीं दिया, ये सभी इतने बेहतरीन खिलाड़ी हैं कि बच निकलने का मौका ही नहीं देते।

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कहीं खुशी तो कहीं गम

इटली के कोच वेंचुरा तो रेफरी के सिर पर सबकुछ मढ़ते हुए अपने खिलाड़ियों का बचाव करते रहे। हां, यह भी सही है कि कुछ मौकों पर इटली को रेफरी की गलतियों का खामियाजा भुग़तना पड़ा। रेफरी मातेऊ लोहो ने पहले हॉल में साफ हैंडबॉल को नहीं देखा। बाद में स्वीडन के एंड्रियाज ग्रांक्विस्ट ने बॉक्स के अंदर मार्को पारोलो को गिराया लेकिन उसकी भी अनदेखी की गई। इसमें शायद ही किसी को शक हो कि इटली ने दूसरे चरण में बेहतरीन खेल दिखाया लेकिन यह भी सच्चाई है कि इस सबके बावजूद उसके फॉरवर्ड स्वीडिश गोल को भेद ना सके। कोच वेंचुरा द्वारा अब तक उपेक्षित जोरजिन्हो ने बेहतरीन खेल दिखाते हुए कई बार अच्छी ओपनिंग की लेकिन कोई उसे फाइनल टच नहीं दे पाया। इटली की टीम कई बार गोल बनाने के करीब पहुंची लेकिन भाग्य शायद उसके साथ नहीं था। जस्टिग का हेडर बार को लगकर पुन: उन्हीं तक लौट आया। इसी तरह पारोलो का हेडर और फ्लोरेंजी की स्टाइलिश वॉली दोनों लगभग गोल पोस्ट को छूते हुए बाहर निकल गईं। ईश्वर शायद आज इटली के साथ नहीं था।

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