इसे पढ़िए अगर आप हैं हार्ट अटैक के रोगी !

हार्ट अटैक एक प्रकार का अटैक यानी दौरा है जो हर किसी को तो नहीं पर किसी – किसी को आता है ज्यादातर जिसका शरीर मोटा तगड़ा हो उसे दिल के दौरे आते है और देहांत तक हो जाते है ।

इसके कारण क्या है

वात, उपदंश, बहुत ज्यादा धूम्रपान या शराब पीना, बहुत दिनों का मानसिक उद्वेग, हृदय रोग, रक्त वाहिनियों के रोग, वृक्क रोग, गठिया और स्थूलता आदि कारणों से दिल में दर्द उठता है। अत्यधिक शारीरिक परिश्रम, अधिक चिन्ता, आवेश, सदमा तथा दंश, परम्परागत आदि इस रोग के कारण है।

लक्षण

हृदय स्थान पर तीव्र वेदना उठती है और बेचैनी हो जाती है। दिल में एकाएक दर्द उठकर बाँये कंधे तक और फिर हाथ तक फैल जाता है। साँस जल्दी-जल्दी चलने लगती है, घबराहट, तेज दर्द, ठण्डा पसीना तथा बेहोशी तक आ जाती है। दर्द इतना तेज होता है मानों छाती में कोई चीर-फाड़ कर रहा हो, जी मिचलाना, वमन, हाथ-पैर ठण्डे, नब्ज कमजोर बैठी हुई-सी आदि इस रोग के लक्षण हैं।

इसका आयुर्वेदिक उपचार

जायफल जावित्री, दालचीनी, अकरकरा समान भाग लेकर चार गुने शहद में मिलाकर रखें, इसे दो ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन लेने से मस्तिश्क एवं हृदय शक्ति का संचार होता है।

मुलेठी तथा कुटकी का चूर्ण आधा-आधा चम्मच (करीब 3-3ग्राम) लेकर उसे मिलाकर, गुनगुने पानी के साथ सेवन करने से हृदय रोग में लाभ होता है।

एक पाव पानी के अन्दर 1 सेर चीनी डालकर उसकी चासनी कर लो, उसके बाद उसमें आधा सेर अनार का रस डालकर उसकी एक तार की चासनी करके बोतलों में भर दो। इस शर्बत को 2 तोले से ढाई तोले तक की मात्रा में लेने से दिल की जलन, अमाशय की जलन, घबराहट, मूर्छा आदि दूर होती है, यह शर्बत हृदय के लिए बलकारी है।

गुलाब के सूखे फूल का चूर्ण लेकर उसमे बराबर की मिश्री मिलाकर गाय के दूध के साथ सेवन करने से हृदय रोग में शान्ति मिलती है।

शहद हृदय की कमजोर पड़ गयी माँसपेशियों को मजबूत बनाता है तथा हिमोग्लोबिन का निर्माण करता है।

करौंदे के मुरब्बे से हृदय रोग दूर होता है तथा चटनी से प्यास मिटती है।

ब्राम्ही के साथ गिलोय के टुकडे पानी में डालकर काढ़ा बनाएँ, यह काढ़ा सुबह-शाम खुराक में पीने से हृदय पीड़ा और दिमागी कमजोरी दूर होती है।

आँवले के मुरब्बे में तीन-चार बूँद अमृतधारा डालकर खिलाने से हृदय रोग में राहत मिलती है।

लाल बथुए का रस पीने से हृदय तेज धड़क रहा हो तो सामान्य हो जायेगा।

हृदय रोगियों को मौसमी का रस बहुत ही लाभप्रद है।