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क्या है आध्यात्म या आध्यात्मिक होना?

लोग जब योग और प्रणायाम करने लगते हैं तो उन्हें लगता है कि वे आध्यात्मिक हो गए हैं या फिर बहुत ज्यादा पूजा-पाठ करते हैं तो भी वे खुद को आध्यात्मिक समझ बैठते हैं। जबकि पूजा-पाठ करना आध्यात्मिक होना नहीं धार्मिक होना होता है। इसी तरह प्रणायाम, ध्‍यान और इसी तरह की गतिविधियों में हिस्सा लेना भी आध्यात्मिक होना नहीं कहलाता। इसके बजाय इसे अपने स्वास्थ्य के प्रति काॅन्शस होना कहा जाता है। क्या आप जानना चाहते हैं कि आध्यात्मिक होने का सही मायने क्या है?
-अध्‍यात्‍मिकता न तो कोई गतिविधि है और न ही ऐसी कोई चुनौती, जिसे करने से आप आध्‍यात्‍मिक हो जाएंगे।
-जिंदगी जीने और समझने का ढंग आध्‍यात्‍मिकता कहलाता है।
-अगर आप अपनी जिंदगी को आध्‍यात्मिकता में बिताना चाहते हैं तो आप जो दिनभर जो भी एक्टिविटी करते हैं, उसे 24 घंटे ध्‍यान में रखिए।
-ध्‍यान से ही हर एक एक्टिविटी को करें।
-आप यह देखें कि खुद को बेहतर कैसे बना सकते हैं।
-अपने आस-पास की जिंदगी को भी कैसे अच्‍छी कर सकते हैं।
अगर आप ऊपर बताई गई बातों को फाॅलो करते हैं, तो ज्‍यादा से ज्‍यादा अध्‍या‍त्मिकता आपकी जिंदगी में अवशोषित हो जाएगी।

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