जानिए टीबी का घरेलू इलाज !

तपेदिक अत्यन्त भयानक संक्रामक रोग है, यह रोग लोगों के स्वास्थ्य को नष्ट करके उनको काम करने के अयोग्य बना देता है। इसके रोगाणु छोटे-छोटे विरामचिहृ के आकार के होते हैं। ये रोगाणु खाँसने, छीकने तथा जोर से बोलने से रोगी से लगभग 1 मीटर की दूरी से मनुष्य पर आक्रमण करते हैं। ये उस धूल में भी पाये जाते हैं जिसमें रोगी की लार अथवा नाक की श्लेष्मा मिली रहती है।

धूल तथा वायु में मिलकर स्वस्थ व्यक्ति तक पहुँच जाते हैं।

संक्रमित जल अथवा भोज्य पदार्थ, के प्रयोग से मानव शरीर में प्रवेश करते हैं, बहुत-से पालतू जानवर इस रोग के शिकार होते हैं।

यह रोग वंश-परम्परागत भी होते है।

जहाँ धूल अधिक हो, सूर्य का प्रकाश व शुद्ध वायु की कमी हो, वहाँ यह रोग जल्दी आक्रमण करता है।

अपौष्टिक व अपर्याप्त भोजन की कमी से भी यह रोग होता है।

अधिक कार्य तथा अपर्याप्त विश्राम के कारण भी यह रोग होता है।

धूम्रपान, शराब तथा अन्य मादक पदार्थों के सेवन से शरीर दुर्बल व क्षीण हो जाने पर भी यह रोग होता है।

इसके लक्षण क्या है 
प्रारम्भ में रोगी को थकावट अनुभव होने लगती है, धीरे-धीरे भूख कम हो जाती है, काम करने में जी नहीं लगता। फिर थोड़ा बुखार और खाँसी रहने लगती है, खाँसी के साथ-साथ थूक गिरना व छाती में पीड़ा, बार-बार जुकाम, रोगी जल्दी-जल्दी श्वास लेने लगता है, नाड़ी की गति तीव्र, त्वचा पीली पड़ जाती है। कफ के साथ खून आने लगता है और भार में कमी, शाम को तापमान में वृद्धि।

आयुर्वेदिक उपचार

यदि क्षय रोगियों को शहद नियमित रूप से दिया जाये तो वे क्षय रोग से मुक्त हो जाते हैं। वजन बढ़कर खाँसी कम होती है और रक्त संचार में सुधार हो जाता है।

टी.बी. व जिगर के रोग के लिए बकरी का दूध बहुत ही फायदेमंद है।

दो पके केलों को सुबह नाश्ते के रूप में तथा सुबह व शाम भोजन के साथ एक माह तक लेने से शरीर के रस, रक्त आदि धातुओं के क्षय में कमी आती है तथा शरीर स्वस्थ हो जाता है खाँसी में भी राहत मिलती है।

क्षय रोगी को गुलाब के फूलों का सेवन कराया जाये तो उसकी खाँसी, ज्वर और कमजोरी में बहुत लाभ होता है।

टी.बी. से उत्पन्न शारीरिक कमजोरी में गुलकंद काफी लाभदायक होता है साथ ही इसके सेवन से फेफड़ों को बल मिलता है।

बेल की दो सौ ग्राम सूखी गिरी एक किलो पानी में पकायें जब पानी पचास-साठ ग्राम शेष रह जायें तो दो किलो मिश्री डालकर एक तार की चाशनी बना लें। इसमें थोड़ी केसर व जावित्री डाल दें पाँच ग्राम की मात्रा में दिन में चार बार सेवन करने से फेफड़ों का कफ निकल जायेगा, खाँसी जाती रहेगी, बुखार नहीं चढ़ेगा, इस प्रयोग से दमा में भी फायदा होता है।

बकरी का दूध 250 ग्राम, नारियल कसा हुआ 10 ग्राम, लहसुन पिसा हुआ 6 ग्राम-इन तीनों चीजों को पका लें और प्रातः और सायं पिला दें।

पचास ग्राम मक्खन में बीस ग्राम शहद मिलाकर ब्रेड स्लाइस पर लगायें सुबह-शाम यही भोजन करें, सूखा बदन लहरा उठेगा।

सौ ग्राम टमाटर के रस में पन्द्रह ग्राम मछली का तेल (कॉड लिवर ऑयल) मिलाकर रोगी को पिला दें। 5-7 सप्ताह में ही अच्छे लक्षण दिखने लगेंगे।

अमरस के ऊपर शहद मिला दूध पी जायें।