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महिला दिवस विशेष: नारी का अरमान है…

महिला दिवस विशेष: नारी का अरमान है…

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आज 8 मार्च को पूरे विश्व में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जा रहा है। महिला दिवस के माध्यम से महिलाओं के प्रति सम्मान के लिए घोषित इस दिन का उद्देश्य महिलाओं के प्रति श्रद्दा और सम्मान जताना है ताकि महिलाये भी बिना किसी भेद-भाव के प्रगति कर सके। आज महिला सभी क्षेत्रो में आगे भी है।
एक महिला के बिना किसी भी व्यक्ति का जीवन सृजित नहीं हो सकता इसलिए इस दिन को महिलाओं के आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक उपलब्धियों के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।
1* मुक्तक—-

विश्व तिरंगा लहराऊँगी मैं भारत की नारी हूँ।

हर पल आगे बढ़ती जाऊँ नहीं रही बेचारी हूँ।।

चट्टानों सा जिगरा मेरा दुश्मन थर-थर काँप रहा;

कर्म धर्म से भाग्य बनाऊँ नहीं किस्मत से हारी हूँ।।

💐मुक्तक

गुमनाम अँधेरे से नहीं ,लगता अब तो डर।
बंद गली में कर लिया ,जबसे रैन बसर।।
कुटिल नीति को त्याग कर,सबके संग चले ;
मन के किवाड़ खोलकर ,नारी करे सफर।।

2* दोहे—-

नारी अब अबला नहीं,रखती नर सा तेज।

हिम्मत से आगे बढ़े,छोड़ फूल सी सेज।।1*

हर मुश्किल आसान हो,नारी का हो संग।

प्रेम लुटाकर भर रही ,जीवन में नव रंग।।2*

विपदाओं के पार भी,है देखो संसार।

खुशियाँ आंगन में खिलें,नारी को दे प्यार।।3*

देवी ,चण्डी से बनी,नारी की पहचान।

नारी का अरमान है,बढ़े देश की शान।।4*

नारी का अपमान जो,करते हैं हर रोज।

अपनी हस्ती के लिए,घर की करते खोज।।5*

चाह करें जो पुत्र की,नारी को दें मान।

कन्या-पूजन से बने ,जग में पुरुष महान।।6*

अभिलाषा पूरी करें,बेटी को दें ज्ञान,

भारत माँ के मुख सजे,फिर सुन्दर मुस्कान।। 7*

3* वीर छंद——धाय माँ पन्ना(ऐतिहासिक पात्र)

धन्य समर्पण माँ पन्ना का,
याद रखेगा यह संसार।
कुँवर उदय की रक्षा खातिर,
दिया पुत्र चन्दन को वार।।

आस्तीन के साँप विषैले,
फन फैलाये हुए तमाम,
पन्ना माँ के साहस आगे,
भागे अपना लेकर चाम।।

माँ की बाँहों में चंदन ने ,
काटी थी अंधेरी रात।
पुत्र प्रेम भी जीत न पाया,
पन्ना माँ के मन जज्बात।

देश-प्रेम का फर्ज निभाया,
राष्ट्र भले में करके त्याग।
विफल किया बनवीर चाल को
कुँवर उदय के बदले भाग।।

दिल पर पत्थर रखकर उसने,
सुनी पुत्र की अंत पुकार
ममता की मूरत जननी ने,
किया राष्ट्र से अनुपम प्यार।।
4*ताँका—-नारी परीक्षा

(1)

नारी परीक्षा
अनवरत चले
दीक्षा में शिक्षा
देकर करो विदा
सीढ़ी प्रगति बढ़े!!

(2)

उठते रहे

अनबूझे सवाल

हर क्षण हैं

ढूँढती उत्तरों को
परीक्षाएं दे रही!!
5* घनाक्षरी

रक्त सनी लाश देख,रोंगटे खड़े हुए ;
भीड़ खड़ी चुपचाप,कुछ तो लजाइये।।

चहुँ ओर हाहाकार, त्राहि-त्राहि लोग करें;
शिकारी बलात्कारी से नारी को बचाइये।।

वहशीपुने को सहे, न्याय की गुहार करे;
दहेज के लोभियों से ,उसको छुड़ाइये।।

बेचती ईमान को जो,नारी वो महान नहीं;
देवी,चण्डी,दुर्गा बन,खुद को सजाइये।।

 

Dr.-Purnima-Rai

– डॉ.पूर्णिमा राय,

मैनेजिंग एडिटर
नवयुग सन्देश
www.navyugsandesh.com

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