अपनाएं यह तरीका शरीर के अंग अगर पड़ जाए सुन्न !

शरीर के अंगों का सुन्न पड़ना एक प्रकार का रोग ही है।जिसमें एक ही स्थिति में बैठे रहने से रक्त वाहिनियों और मांसपेशियो के दबने से सामान्य रूप से शरीर का वह भाग सुन्न हो जाता है। रक्त प्रवाह में बाधा या धीमापन आने से भी सुन्नता आ जाती है, कई बार किसी अंग को पर्याप्त आँक्सीजन न मिल पाये शरीर का वह हिस्सा सुन्न हो जाता है। इसके अगर लक्षणों की बात की जाए तो ,हल्की झनझनाहट, धीरे-धीरे संज्ञा-शून्य, सुई चुभाने पर उस अंग में अनुभूमि न होना आदि लक्षण है।

इसके लिए यह है घरेलू उपचार

बहुत से लोगों के अंग विशेष सुन्न पड़ जाने की शिकायत रहती है। जो अंग बार-बार सुन्न पड़ जाता है उसमें पपीते के बीजों को पीस कर सरसों के तेल में मिलाकर धीरे-धीरे पन्द्रह दिनों तक मालिश करने से लाभ होता है।

प्रातः उठते ही बिना कुछ खाये-पिये जरा-सी सोंठ और लहसुन की दो पुतियाँ छीलकर चबा लें, ऊपर से पानी पी लें। 10 दिन तक यह प्रयोग करें, ध्यान रहे जिन्हें लहसुन खाने से कोई कष्ट हो वे इस प्रयोग को न करें।

सोंठ की एक गाँठ और लहसुन की एक गाँठ लेकर सिल पर पानी का छींटा देकर पीसकर लेप-सा बना लें, इस लेप को उस अंग पर लगायेजो सुन्न पड़ जाता हो, 10 दिनों तक यह प्रयोग नित्य एक बार करते रहें, लेप सूखने पर उतार दें।

जिन लोगों के पैर बार-बार सुन्न हो जाते हैं उन लोगों को पैरों के तलवों में तेल की मालिश करने से उनमें स्थिलता रहती है।

दो चम्मच (बड़े) नारियल तेल में दो बूंद जायफल का तेल डालकर मिला लें। त्वचा की शून्यता वाले अंग पर यह तेल लगाकर मालिश करने से त्वचा-शून्यता दूर होती है।

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