कोरोना के बाद अब चीन में ‘काली मौत’ का साया, करोड़ों लोगों की जान ले चुकी है यह बीमारी

कोरोना महामारी की तबाही के बाद चीन में अब ‘काली मौत’ का खतरा मंडराने लगा है। वहां के एक शहर में रविवार को ब्यूबोनिक प्लेग को लेकर अलर्ट जारी हुआ है। जिसके बाद लोगों और अधिकारियों की चिंताएं बढ़ गई है। चूहों से फैलने वाला यह प्लेग बेहद ही संक्रामक और जानलेवा साबित होता है। इस बीमारी को मध्य काल में ‘काली मौत’ के नाम से भी जाना जाता था। चीन में शनिवार को इस बीमारी से ग्रसित एक संक्रामक व्यक्ति की पुष्टि हुई है।

यह प्लेग आमतौर पर छोटे स्तनधारियों और उनके पिस्सू में पाया जाता है। संक्रमित पिस्सू के काटने पर लोग इस प्लेग की चपेट में आ जाते है और यह संक्रमण ब्यूबोनिक प्लेग में बदल सकता है। कई बैक्टिरिया के फेफड़ों में पहुंचने पर ब्यूबोनिक प्लेग न्यूमानिक प्लेग में बदल जाता है। ब्यूबोनिक प्लेग में ज्यादा खतरा नहीं होता क्योंकि यह एक से दूसरे व्यक्ति में आसानी से नहीं फैलता। लेकिन न्यूमानिक प्लेग इलाज नहीं मिलने पर जानलेवा हो सकता है।

दोनों प्लेग में यदि समय से इलाज हो जाए तो रिकवरी रेट बेहतर है। ब्यूबोपिनक प्लेग के लक्षण एक से सात दिन में उभरते है। इस प्लेग में तेज बुखार होता है। ठंड लगती है, शरीर और सिर में दर्द, कमजोरी, उल्टी या जी मिचलाना, लिंफ नोड्स में सूजन और दर्द होता है। वही न्यूमानिक प्लेग के लक्षण संक्रमण के तुरंत बाद दिखने लग जाते है, कई बार यह 24 घंटे का समय भी लेते है। इसमें सांस लेने और खांसी में परेशानी और थूक में खून दिख सकता है।

क्यों कहा जाता है काली मौत

मध्य काल में यह बड़े पैमाने पर फैली और करोड़ों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। इस बीमारी से 1300 ई. में यूरोप की तिहाई आबादी की मौत हो गई थी। 2010 से 2015 के बीच 3,248 केस दुनियाभर में सामने आए, जिससे 584 लोगों की मौत हुई। इस वजह से इसे ब्लैक डेथ यानी काली मौत कहा गया।

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