Breaking News
Home / ट्रेंडिंग / महाराष्ट्र के “असली किंग मेकर” अजित पवार की पूरी कहानी

महाराष्ट्र के “असली किंग मेकर” अजित पवार की पूरी कहानी

पिछले 52 सालों में महाराष्ट्र की बारामती से विधायक की कुर्सी पर सिर्फ दो ही लोग बैठे हुए है। दोनों ही एक परिवार के सदस्य है एक चाचा है तो दूसरा भतीजा जी हाँ हम बात कर रहे है शरद पवार और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की।

Loading...

दोनों ही इस सीट से छह छह बार विधायक की कुर्सी जीत चुके हैं। दोनों ने कुल मिलकर 8 बार काँग्रेस और 4 बार एनसीपी के झंडे पर जीत हासिल की है। शरद पवार 1967 से लेकर 1990 तक काँग्रेस की तरफ से लड़े और लगातार जीते। बाद में उनही के भतीजे अजित पवार ने 2 बार काँग्रेस की दावेदारी संभाली और जीत हासिल की।

इसके बाद शरद पवार ने काँग्रेस से खुद को अलग कर एनसीपी का गठन किया। तब से लेकर अभी तक अजित पवार यहाँ लगातार 4 बार जीत हासिल कर चुके हैं। शिवसेना और भाजपा का कोई भी नेता यहाँ कभी जीत नहीं पाया हैं। वहीं इस बार महाराष्ट्र विधान सभा चुनाव में इनहोने सातवी बार इस सीट से जीत दर्ज की है।

कौन है अजित पवार ?

अजित पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को महाराष्ट्र के अहमदाबाद जिले में हुआ। उनके पिता का नाम अनंतराव पवार है जो एनसीपी पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार के बड़े भाई है। उनके पिता राजकमल स्टुडियो में काम करते थे।

अजित पवार अपने चाचा को देखते हुए राजनीति में आए। राजनीति में उन्होने अपनी शुरुवात राजनेता से की और आज वे महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री का पद संभाल रहे है। वह जनता के बीच दादा के नाम से मशहूर है। अजित पवार ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा देओली प्रवर से आरंभ की और माध्यमिक शिक्षा महाराष्ट्र बोर्ड से की। पवार ने माध्यमिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद पढ़ाई से नाता तोड़ दिया।

अजित पवार का राजनीतिक करियर

अजित पवार ने अपनी राजनीतिक जिंदगी 1982 में आरंभ की। उस वक़्त वो महज 20 साल के थे। उन्होने राजनीतिक के आरंभ में सबसे पहले एक चीनी सहकारी संस्था के लिए चुनाव लड़ा। इसके बाद पुणे में वर्ष 1991 में वह जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष बने और 16 साल तक उन्होने यह पद संभाला।

अजित 1991 में बारामती निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा के लिए चुने गए परंतु अपने चाचा के वजह से उन्होने यह सीट छोड़ दिया। जो वी.पी. नरसिम्हा राव के पार्टी में रक्षा मंत्री थे। फिर वे महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए चुने गए और वर्ष 1992 से फरवरी 1993 तक वे कृषि और बिजली राज्य मंत्री पद पर नियुक्त रहे।

अजित पवार ने तब तक धीरे धीरे राजनीति में अपना एक अहम नाम बना लिया था। वर्ष 1995, 1999, 2004, 2009 और 2014 में बारामती निर्वाचन क्षेत्र से वे लगातार विजयी रहे। वे अब तक कृषि, बागवानी और बिजली राज्य मंत्री, जल संसाधन मंत्री का पद संभाल चुके है। वे 2012 से 1014 तक महार्श्त्र के उपमुख्यमंत्री भी रहे।

अजित पवार का नाम 2013 में सिंचाई घोटाले से भी जुड़ा था जिसके बाद उन्हे अपने पद से इस्तीफा देना पड़ गया। पर बाद में उन्हे क्लीन चिट दे दी गयी जिस के बाद उन्होने अपना पद पुनः संभाला। अजित पवार को महाराष्ट्र चुनाव में एक अहम और मजबूत नेता के रूप मे देखा जाता है।

विवादों से हमेशा जुड़ा रहता है नाम

अजित पवार का नाम हमेशा किसी न किसी विवाद से जुड़ा ही रहता है। साल 2013 में उनका आया कथित बयान लोगों और नेताओं के बीच चर्चा का विषय बन गयी उन्होने पुणे के एक कार्यकर्म में कहा था कि अगर बांध में पानी नहीं है तो क्या हम उसमे पेशाब कर के भरेंगे? उनकी इस कारण काफी आलोचना भी हुई जिस के बाद उन्होने सार्वजनिक आकार माफी भी मांगी।

माफी मांगते हुए उन्होने कहा था कि यह उनके जीवन कि सबसे बड़ी गलती है। उनपर 2014 चुनाव के समय मतदाताओं को धमकाने के भी आरोप लगे है। अपनी धम्की में उन्होने कहा था कि अगर सुप्रिया सुले को वोते नहीं दिया तो गाँव वालों का वो पानी बंद करवा देंगे।

उनका नाम कई भ्रस्ताचार के मामलों में भी आया है अभी हाल ही में मुंबई पुलिस ने कथिक रूप से उनके द्वारा इस्तेमाल कि जाने वाली कार को जब्त किया जिसमे 4 लाख 85 हजार रु भी मिले थे। उन पर अपनी पावर को गलत ढंग से इस्तेमाल करने के आरोप भी लगते रहे है।

देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार के शपथ लेने के बाद बोले शरद पवार – यह एनसीपी का फैसला नहीं है

Loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *