बांसवाड़ा के सभी कोरोना मरीज हुए नेगेटिव, जानिए स्वास्थ्य विभाग को कैसे मिली सफलता?

राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में प्रशासन एवं चिकित्सा महकमे के लिए जून महीने का पहला दिन कोरोना वायरस संक्रमण से निजात के लिए किए गए कारगर उपायों एवं रणनीतिक प्रयासों की बदौलत जिले के सभी कोरोना मरीज नेगेटिव होने की सफलता के रुप में सामने आया। यह कार्य जिला प्रशासन एवं चिकित्सा विभाग के साथ बांसवाड़ा जिले के बाशिन्दों के लिए सुकून की खबर देने के साथ दूसरे के लिए प्रेरणादायक बना है।

सोमवार को आई यह खुशखबरी प्रशासन की कड़ी मेहनत एवं चिकित्सा विभाग के डाक्टर्स एवं कोरोना वारियर्स की सेवा ने इस परीक्षा की घडी में सफलता को पाने में सार्थक रही। जिले में प्रशासन के साथ जनप्रतिनिधियों का इस महामारी पर नियन्त्रण के लिए दिया गया सहयोग कोरोना संक्रमण पर काबू पाने में महत्वपूर्ण रहा है। बांसवाड़ा जिले से राहत की खबर है कि वहां सभी कोरोना पॉजिटिव अब नेगेटिव हो चुके है। चिकित्सा विभाग एवं अन्य विभागों के समन्वय से यह जीत हासिल हुई है हालांकि संघर्ष अब भी जारी है, लेकिन अब तक के प्रयासों से जो सफलता मिली है, इसे भुलाया नहीं जा सकता।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.हीरालाल ताबियार ने बताया कि जिले में मार्च माह में एक भी कोरोना केस नहीं था लेकिन इस माह के अन्त में 31 मार्च को कुशलगढ़ निवासी 48 वर्षीय कोरोना संदिग्ध चिन्हित किया गया। हालांकि जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई, लेकिन बांसवाड़ा जिला चिकित्सालय के आइसोलेशन वार्ड में उसकी मृत्यु हो गई। इसके बाद उसके परिवार के सदस्याें के सैंपल 2 अप्रेल .2020 को लिए गए, जिनकी रिपोर्ट 4 अप्रेल .2020 को प्राप्त हुई, जिसमें मृतका के पुत्र और कोरोना से पति पॉजिटिव पाए गए। यहीं से शुरू हुई स्थानीय चिकित्सा और प्रशासन सहित अन्य विभागों की संघर्ष से सफलता की दास्तान।
इनकी पॉजिटिव रिपोर्ट मिलते ही जिला प्रशासन के निर्देशनुसार मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एच.एल. ताबियार की अगुवाई में जिला रेपिड रेस्पोन्स टीम (आरआरटी) कुशलगढ़ में तुरन्त प्रभाव से तैनात की गई, जिला आरआरटी द्वारा त्वरित कार्य करते हुए पॉजिटिव पाए गए लोगों को उदयपुर भेजने के साथ क्षेत्र में सर्वे कार्य शुरू किया गया।

जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने भी कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए कारगर योजना बनाकर उसे मूर्त रूप देते हुए सफलता प्राप्त करने तक पूरी मुस्तैदी के साथ कार्य को अंजाम देने में जुटे रहे। कोरोना संक्रमण का हाट स्पाट बन चुके कुशलगढ को कोरोना संक्रमण से मुक्ति दिलाने के लिए प्रशासन के अधिकारियों के साथ ही बांसवाड़ा जिला कलक्टर श्री कैलाश बैरवा, राज्य सरकार द्वारा नियुक्त आईएएस डॉ. भंवरलाल, जिला पुलिस अधीक्षक श्री केसरसिंह शेखावत, अतिरिक्त जिला कलक्टर श्री नरेश बुनकर ने समय-समय पर कुशलगढ का दौरा कर योजनाबद्ध रूप से कोरोना संक्रमण से मुक्त होने के लिए दिशा-निर्देश प्रदान करते हुए इस सफलता को प्राप्त किया गया।

कुशलगढ में कैसे पाया मुकाम

कुशलगढ में 4 अप्रैल को दो पॉजिटिव मिलने के बाद चार दिन बाद ही एक महिला पॉजिटिव पाई गई। उसका पोता 14 मार्च को जामिया एकडमी, मरोल, मुम्बई से कुशलगढ लौटा था। लगभग 7 से 9 दिन बाद घर के सभी सदस्यों को हल्की सर्दी- जुकाम एवं बुखार जैसे लक्षण दिखाई दिए। उसके बाद दवाई लेने पर 6-7 दिन में ठीक हो गए। इसी दौरान एक महिला पॉजिटिव आई जो इनके सम्पर्क में आई थी। इसके बाद लगातार सैंपलिंग का काम जारी रहा और पॉजिटिव मरीज मिलते रहे।

चिकित्सा विभाग एवं प्रशासन द्वारा कस्बे में संक्रमण के प्रभावी रोकथाम के लिए कफ्र्यु लगा कर कन्टेनमेंट प्लान बना कर पॉजिटिव पाए गए मरीजों के घर को एपीसेन्टर मानते हुए 3 किमी. परिधि का कन्टेनमेंट जोन बनाया गया एवं 67 टीमों द्वारा सघन सर्वे कार्य शुरू करवाया गया तथा पॉजिटिव मिलने वाले केसों को आर.एन.टी मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया। टीमों द्वारा पहले दिन में 802 घरों के 4214 लोगाें का सर्वे किया गया । इसके बाद सर्वे टीम लगातार अपना काम करती रही। पॉजिटिव के संपर्कों में आए लोगों के सैंपल भी लिए गए। कुशलगढ़ में ही 68 मरीज पॉजिटिव पाए गए व इसके अलावा जिले भर में यह आंकड़ा 85 का रहा। इसमें से दो की मौत हो चुकी है। अन्य सभी स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुके है।

सर्वे कार्य में तेजी

जिले भर में अब तक पांच राउंड में 26 लाख 45 हजार 158 घरों में सर्वे किया जा चुका है। वहीं होटस्पॉट कुशलगढ़ में एक किमी के भीतर 19 राउंड किए गए, जिसमें 39 हजार 461 घरों को कवर किया गया। वहां पर तीन किमी के क्षेत्र में 1 लाख 44 हजार 147 और तीन से पांच किमी में 78 हजार 460 घरों में क्रमशः 17 व 16 राउंड में सर्वे का काम किया गया।

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