राजद द्वारा सीटो की संख्या घोषित करने पर सहयोगी दलों ने दी अपनी-अपनी प्रतिक्रिया

महागठबंधन के भीतर सीटों को लेकर सियासत शुरू हो गई है। बिहार विधानसभा चुनाव की गाइडलाइन जारी होते ही सभी पार्टियाँ अपने-अपने तरफ से जी-तोड़ मेहनत करना शुरू कर चुकी है। सभी दल चुनावी तैयारी में तो जुट गए हैं लेकिन अभी तक महागठबंधन और NDA में सीटों को लेकर कुछ भी फ़ाइनल नहीं हो सका है। NDA  भी महागठबंधन के बीच सीटों के बटवारे का इंतज़ार कर रहा है तो वहीँ महागठबंधन के नेता तेजस्वी यादव सबसे पहले कांग्रेस पार्टी के साथ डील फ़ाइनल करना चाहते हैं। क्योकि जबतक कांग्रेस के साथ डील फाइनल नहीं हो जाती तबतक छोटे दलों के साथ तेजस्वी यादव सीटों को लेकर बातचीत नहीं करना चाहते। इधर राजद द्वारा सीटों के बटवारे में की जा रही देर से घटक दलों के नेताओं की बेचैनी बढती जा रही है।

हम पार्टी के मुखिया जीतन राम मांझी महागठबंधन छोड़ देने का एलान पहले ही कर चुके हैं। इस बीच अब राजद ने 160 सीटों का चुनाव लड़ने का ऐलान कर घटक दलों की चिंता और नाराजगी और भी बढ़ा दी है। कांग्रेस पार्टी के विधायक दल के नेता सदानंद सिंह का कहना है कि अभी किसी के दावे का कोई मतलब नहीं है। कांग्रेस विधायक दल के नेता सिंह ने कहा कि, “कौन क्या दावा करता है फिलहाल उससे कुछ नहीं हो सकता। कांग्रेस कितनी सीटों पर जीत सकती है इसका रिपोर्ट पार्टी आलाकमान को भेज दिया गया है। अगले कुछ सप्ताह के भीतर पार्टी आलाकमान सारी बातों पर फैसला ले लेगी। सीट को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा करने से कोई मतलब नहीं है”।

वहीं महागठबन्धन के एक और सहयोगी रालोपसा ने भी आरजेडी के दावों को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया है। रालोसपा के मुख्य प्रवक्ता अभिषेक झा ने बताया कि, “सीट बंटवारे की बात महागठबंधन के बैठक में तय होगा। बिना बैठक किये कोई कुछ भी दावा करे इसका कोई मतलब नहीं है। राजद का दावा पूरी तरह से निराधार है”।

इधर सीट बंटवारे को लेकर जदयू ने महागठबन्धन में चल रहे घमासान पर बोला कि तेजस्वी यादव अहंकारी नेता है। जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि तेजस्वी यादव अपने अहंकार के कारण अपने सहयोगी दलों को ध्यान दिये बिना अपने सीटो कि संख्या घोषित कर दिये। उनको अपने दलों कि कोई चिंता नहीं है।