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चंद्रयान-2: चांद की कक्षा में स्थापित हुआ भारत का महत्वपूर्ण मून मिशन

चंद्रयान-2 चांद की कक्षा में पहुंच गया है. चंद्रयान-2 को चांद की कक्षा में स्थापित करने का इसरो का  मिशन पूरी तरह सफल रहा है. इस संबंध में इसरो अध्यक्ष के. सिवन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने कहा कहा, “चंद्रयान 2 मिशन ने आज एक अहम पड़ाव पार किया है.

सुबह 9 बजे लगभग 30 मिनट का प्रक्रिया के बाद चंद्रयान चंद्रमा की निर्धारित कक्षा में पहुंच गया. इसरो अध्यक्ष के. सिवन ने बताया, “अगला अहम कदम 2 सितंबर को होगा, जब लैंडर को ऑरबिटर से अलग किया जाएगा. 3 सितंबर को लगभग तीन सेकंड की एक छोटी-सी प्रक्रिया होगी, ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि लैंडर के सभी सिस्टम सही काम कर रहे हैं.” उन्होंने यह भी कहा कि 7 सितंबर को चंद्रयान 2 करीब 1.55 मिनट पर चांद की सतह पर उतरेगा.

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चंद्रयान-2 मिशन आखिर है क्या, यह भारत के लिए महत्वपूर्ण क्यों है? इसमें कितने पेलोड हैं, यह कैसे डेटा भेजेगा और इकट्ठा करेगा इत्यादि. इस पर डिटेल से चर्चा करते है:-

क्या है चंद्र मिशन-2?

इसरो के अनुसार, ”चंद्रयान-2 चंद्रमा के दक्षिणी हिस्से पर उतरेगा और वही पर इसका में फोकस रहेगा . ये तकनीकि रुप से बहुत मुश्किल क्षण होगा क्योंकि भारत ने पहले कभी ऐसा नहीं किया है.”

साथ ही बताया कि अच्छी लैंडिग के लिए जितने प्रकाश और समतल सतह की आवश्यकता होती है वो उसे दक्षिणी हिस्से में मिल जाएगा. इस मिशन के लिए पर्याप्त सौर ऊर्जा उस हिस्से में मिलेगी. साथ ही वहां पानी और खनिज मिलने की भी उम्मीद है.

 चंद्रयान-2 से जुड़े कुछ ख़ास तथ्य 

  • यह चंद्रमा पर भेजा जाने वाला भारत का दूसरा तथा चंद्रयान-1 का उन्नत संस्करण है. यहीं आपको बता दें की 2 अक्तूबर, 2008 को चंद्रयान-1 का सफल प्रक्षेपण किया गया. चंद्रयान-1 को पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल, यानी PSLV-C 11 रॉकेट के ज़रिये सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र श्री हरिकोटा से लॉन्च किया गया था. चंद्रयान-1 का मकसद पृथ्वी के एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह के बारे में अपने ज्ञान का विस्तार करना था.
  • चंद्रयान-2 एक जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल मार्क III M1 रॉकेट (भारत का सबसे शक्तिशाली बूस्टर) के जरिये लांच किया जाएगा.
  • वर्ष 2010 के दौरान भारत और रूस के बीच यह सहमति बनी थी कि रूसी अंतरिक्ष एजेंसी ‘Roscosmos’ चंद्र लैंडर (Lunar Lander) का निर्माण करेगी तथा इसरो द्वारा ऑर्बिटर और रोवर के निर्माण के साथ ही जी.एस.एल.वी. द्वारा इस यान की लॉन्चिंग की जाएगी.
  • किंतु, बाद में यह निर्णय लिया गया कि चंद्र लैंडर का विकास (Lunar Lander development) भी इसरो द्वारा ही किया जाएगा. इस प्रकार “चंद्रयान-2 अब पूर्णरूपेण एक भारतीय मिशन है“.
  • चंद्रयान-2 एक लैंड रोवर और प्रोव से सुसज्जित होगा और चंद्रमा की सतह का निरीक्षण कर आँकड़े भेजेगा जिनका उपयोग चन्द्रमा की मिट्टी का विश्लेषण करने के लिये किया जाएगा.
  • चंद्रयान-2 में मॉड्यूल्स:-
  • चंद्रयान-2 में तीन मॉड्यूल्स हैं: 

     

    ऑर्बिटरः चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर चांद से 100 किमी ऊपर स्थापित किया जायेगा. ऑर्बिटर’ में आठ पेलोड, तीन लैंडर और दो रोवर होंगे. यह चक्कर लगाते हुए लैंडर और रोवर से प्राप्त जानकारी को इसरो सेंटर पर भेजेगा. साथ ही इसरो से भेजे गए कमांड को लैंडर और रोवर तक पहुंचाएगा.

    लैंडर (विक्रम): इसमें 4 पेलोड हैं. इसकी शुरुआती डिजाइन इसरो के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर, अहमदाबाद ने बनाया था. बाद में इसे बेंगलुरु के यूआरएससी ने विकसित किया. रूस के मना करने पर इसरो ने स्वदेशी लैंडर बनाया है. इसरो द्वारा लैंडर का नाम इसरो के संस्थापक और भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया है.

    रोवर (प्रज्ञान): यह एक रोबोट है और इसका वजन 27 किलोग्राम है तथा इस रोबोट पर ही पूरे मिशन की जिम्मदारी होगी. इसमें दो पेलोड हैं. चांद की सतह पर यह करीब 400 मीटर की दूरी तय करेगा. इस दौरान यह विभिन्न वैज्ञानिक प्रयोग करेगा. फिर चांद से प्राप्त जानकारी को विक्रम लैंडर पर भेजेगा. लैंडर वहां से ऑर्बिटर को डाटा भेजेगा. फिर ऑर्बिटर उसे इसरो सेंटर पर भेजेगा. इस पूरी प्रक्रिया में करीब 15 मिनट लगेंगे. अर्थात यह कहा जा सकता है कि प्रज्ञान रोबोट से भेजी गई जानकारी को भारत में मौजूद इसरो सेंटर तक आने में लगभग 15 मिनट लगेंगे.

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