अपनी मर्जी से कहीं भी और किसी भी जगह धरना प्रदर्शन नहीं कर सकते: सुप्रीम कोर्ट

सर्वोच्च न्यायालय ने शाहीन बाग धरना प्रदर्शन मामले में पुनर्विचार याचिका को खारिज करते हुए कहा कि अपनी मर्जी से कहीं भी और किसी भी जगह धरना प्रदर्शन नहीं कर सकते. इस मामले में एक सीमा तय है और सभी को इसका पालन करना होगा. न्यायालय ने कहा कि लोकतंत्र में सबको धरना-प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन उसकी भी एक सीमा है. इस सीमा से आगे जाने पर कानूनी एक्शन लिया जा सकता है.

सर्वोच्च न्यायालय ने शनिवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए शाहीन बाग मामले में पिछले साल दिए गए निर्णय को बरकरार रखा. विरोध जताने के लिए धरना प्रदर्शन लोकतंत्र का हिस्सा है. लेकिन इसकी आड़ में लोग अपनी मर्जी से कहीं भी और किसी भी जगह धरना प्रदर्शन नहीं कर सकते.

जस्टिस एसके कौल, जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस कृष्ण मुरारी की बेंच ने पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि लंबे समय तक प्रदर्शन करके सार्वजनिक स्थानों पर दूसरों के अधिकारों को प्रभावित नहीं किया जा सकता. विरोध प्रदर्शन का हक हर जगह नहीं हो सकता, सभी लोगों को इसे समझना चाहिए. न्यायालय ने शाहीन बाग पर पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी.

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