अक्टूबर 2021 में कश्मीर में रहने वाले लगभग 115 कश्मीरी पंडित परिवार जम्मू चले गए :MHA

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आज संसद के शीतकालीन सत्र में जम्मू और कश्मीर के बारे में कुछ ऐसी जानकारियां दी जिससे पता चलता है कि घाटी में केंद्र सरकार के द्वारा स्थित सामान्य करने के प्रयास के बीच अभी भी पूरी सफलता नहीं मिल पा रही है, जैसा कि धारा 370 के हटने पर उम्मीद की गई थी। हालांकि कुछ क्षेत्रों में जरूर सुधार हुआ है।

राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में गृह मंत्रालय ने बताया कि अक्टूबर 2021 में कश्मीर में रहने वाले लगभग 115 कश्मीरी पंडित परिवार जम्मू चले गए है। ये परिवार सरकारी कर्मचारियों के हैं, जिनमें से कई, अधिकारियों की आवाजाही और शिक्षण संस्थानों में शीतकालीन अवकाश के हिस्से के रूप में सर्दियों में जम्मू चले जाते हैं। इनमें से कुछ परिवार भय के कारण भी घाटी छोड़ चुके हैं। बता दें कि 90 के दशक में आतंकियों के धमकी के कारण ज्यादातर कश्मीरी पंडितों का पलायन घाटी से हो चुका है।

गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर के बारे में एक और जानकारी साझा करते हुए बताया कि जम्मू-कश्मीर सरकार की मौजूदा योजना के तहत आतंकवाद से संबंधित हिंसा में मारे गए नागरिकों के परिजनों को 1 लाख रुपए की अनुग्रह राशि का भुगतान किया जाता है। इसके अलावा, एक अलग केंद्रीय योजना के तहत 5 लाख रुपए दिए जाते हैं।

उन्होंने राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर की स्थिति के बारे में जानकारी देते हुए आगे बताया कि 2018 में घुसपैठ की कुल 143 घटनाएं हुईं। इस साल (नवंबर तक) केवल 28 घुसपैठ की घटनाएं दर्ज की गई हैं। गृह मंत्री ने यह भी बताया कि जम्मू-कश्मीर में 2018 के बाद से घुसपैठ और आतंकवादी हमलों की घटनाओं में काफी कमी आई है। 2018 में कुल 417 आतंकवादी घटनाएं दर्ज की गईं। इस साल (21 नवंबर तक), कुल 244 आतंकवादी घटनाएं दर्ज की गई है।

गृह मंत्री ने आगे बताया कि अक्टूबर 2020-अक्टूबर 2021 के दौरान 32 सुरक्षाबलों के जवानों और 19 जम्मू-कश्मीर पुलिसकर्मियों ने कार्रवाई में अपनी जान गंवा दी। दिसंबर 2020 से 26 नवंबर तक पिछले 12 महीनों के दौरान, 14 आतंकवादियों को पकड़ा गया और 165 आतंकवादी मारे गए हैं।

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