गंभीर बीमारी है अस्थमा, ऐसे होगा इसका इलाज

अस्थमा एक ऐसी गंभीर बिमारी है जो बच्चे,युवा और बुर्जुग सभी में इससे बुरी तरह ग्रसित हो सकते हैं। लेकिन हाल ही में बच्चों में यह बिमारी तेजी से बढ़ रहीं हैं। इसका प्रमुख कारण आधुनिक जीवनशैली और जंक फूड के इस्तेमाल को माना जाता हैं। गांवों के मुकाबले शहरों में अस्थमा के ज्यादा मरीज पाए जाते हैं। इसका प्रमुख कारण है कि शहरो में लोग अपने घर के अंदर ही ज्यादा रहना पसंद करते है जिसकी वजह से उन्हें सूर्य की रोशनी नहीं मिल पाती हैं।

अस्थमा का प्रमुख कारण जागरूकता है अभाव होना हैं । अस्थमा में बार-बार ठीक होना और बार-बार बीमार पड़ना जैसी प्रक्रिया से मरीज को गुजरना पड़ता है। यह बीमारी बचपन से ही शुरू हो जाती है। शुरुआत में सर्दी खांसी में आवाज आना और सांस लेने में तकलीफ शुरू होती है और फिर यह धीरे-धीरे बढ़ जाती है। अगर किसी व्यक्ति को हंसते-हंसते खांसी शुरू हो जाए और देर तक ना रुके तो ऐसे व्यक्ति को भी एक बार अस्थमा का चैकअप जरूर कराना चाहिए।

सामान्यत: अस्थमा दो प्रकार का होता है। एक तो कार्डियक अस्थमा, जिसमें खांसी का लक्षण नहीं होता है। वहीं दूसरा पल्मोनरी अस्थमा इसमें खांसी का लक्षण होता है। अस्थमा एक असाध्य श्वसन रोग है, जो फेफड़े में फैलता है। इस रोग में फेफड़ों के वायु छिद्रों में सूजन आ जाती है। इससे वायु छिद्र संकुचित हो जाते हैं, जिससे फेफड़े विभिन्न संक्रमणों की चपेट में आ जाते हैं और अस्थमा के अटैक का खतरा बढ़ जाता है।