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बच्चों को दूध पिलाने का भी एक तरीका होता है, नहीं तो बच्चे को हो सकती है परेशानी

इस बात में कोई दोराय नहीं है कि छोटे बच्चों के लिए मां के दूध से बेहतर दूसरा कोई पौष्टिक आहार नहीं हो सकता। लेकिन कभी-कभी यही पौष्टिक दूध भी बच्चे को नुकसान पहुंचाता है और वजह होती हैं आप। जी हां, छोटे बच्चों को दूध पिलाने का भी एक तरीका होता है और अगर आप उस तरीके से बच्चे को दूध नहीं पिलाती तो बच्चे को कई तरह की परेशानी का सामना करना पड़ सकता है-


हमेशा बच्चे को इत्मिनान से दूध पिलाएं और स्तनपान तब तक बंद ना करें जब तक कि वह खुद से ना छोड़े। अन्यथा बच्चा भूखा ही रह जाता है और वह रोने लगता है। इतना ही नहीं, भूखा होने के कारण उसे नींद नहीं आती और वह चिड़चिड़ा भी हो जाता है।
आपको शायद पता न हो लेकिन स्तनपान के शिशु मां के दिमाग से और विचारों से जुड़ता है। आपका ध्यान अगर टीवी और फोन में होता है तो शिशु के दिमाग के विकास पर तो असर पड़ता ही है साथ ही उसके असहज होने का खतरा बढ़ जाता है।

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जो महिलाएं बच्चे को स्तनपान कराती हैं, स्तनों पर बहुत ज्यादा दबाव डालने वाले और बहुत टाइट कपड़े पहनने से बचना चाहिए। इससे स्तनों से दूध आना तो बाधित होता है ही, साथ ही इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ जाता है।

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