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वैशाखी की पावन बेला…

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वैशाखी की पावन बेला, मन में प्यार जगाती है। नफरत छोड़ो मिलकर बैठो,मन तकरार मिटाती है।।

फसलें ऊँची प्यारी लगती,खेतों में हरियाली है;
कृषकों के जीवन में आई,देखो आज दीवाली है;
अन्न देवता के कारण ही ,जगती हर घर बाती है।।

युग द्रष्टा युग स्रष्टा गुरु ने ,खालस पंथ सजाया था; पावन धाम आनन्दपुर में ही,अमृत पान कराया था; गुरु मर्यादा गुरु सिक्खी यह, सबके मन को भाती है।।

खूनी साका जलियाँवाला ,देखा मन अकुलाया था; उजड़ गया था बाग सुनहरा ,फूल-फूल मुरझाया था; वीर शहीदों की कुर्बानी, हमको याद दिलाती है।।

सुख-वैभव खुशहाली आए,धन-दौलत सौगात मिले; नील गगन में दिखे “पूर्णिमा”,सोने जैसी रात खिले; श्रम उद्यम से किस्मत चमके, वैशाखी बतलाती है।।

– डॉ.पूर्णिमा राय

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