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सबरीमाला में 12 साल की लड़की को दर्शन करने से रोकने की असली वजह आई सामने

पुलिस ने 12 साल की लड़की को आयप्पा मंदिर में दर्शन करने से रोका रोक दिया। लड़की और उसके पिता पोंबा से दर्शन करने के लिए आए थे। पुलिस ने बताया कि बुकिंग के दौरान लड़की कि उम्र 10 साल बताई गयी थी।

लेकिन आधार कार्ड कि जांच करने के बाद पता चला कि लड़की कि उम्र 10 नहीं बल्कि 12 साल है। आयप्पा मंदिर को 16 नवम्बर की शाम को  मंडला-मकाराविल्लाक्कू के लिए 2 महीने के लिए खोला गया है।

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परंपरा की रक्षा करना ही भक्त की पहचान

लड़की को रोके जाने के बाद लड़की के परिवारजनों को सबरीमाला के मौजूदा हालात के बारे में विस्तार से बताया गया। लड़की के पिता और उसके परिवारजनों को मंदिर में प्रवेश करने और पूजा करने से नहीं रोका गया। मंदिर के परंपरा का समर्थन करने वाली 9 वर्ष की एक लड़की भी मंगलवार को सबरीमाला दर्शन करने के लिए पहुंची।

उसने अपने गले में एक पोस्टर टंगा हुआ था जिस पर बड़े बड़े शब्दों में लिखा था कि जब तक मैं 50 साल की नहीं हो जाती तब तक मैं दर्शन के लिए इंतज़ार करती रहूँगी। उसके पिता का कहना था कि भक्त वे होते है जो परम्पराओं और मान्यताओं का आदर करते हैं और उनकी रक्षा करते है।

पहले 12 महिंलाओं को भी रोका गया था

सोमवार को 10 से लेकर 50 वर्ष कि आयु की 2 और शनिवार को इसी आयुवर्ग की 10 महिलाओं को मंदिर में प्रवेश करने से रोका गया था। यह महिलाएं आंध्र प्रदेश से सबरीमाला दर्शन करने के लियी आई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितम्बर 2018 को मंदिर में हर आयु के महिंलाओं के प्रवेश की अनुमति पर फैसला सुनाया था और हर वर्ष की महिलाओं और लड़कियों को दर्शन करने की अनुमति भी दे दी थी। इसके बाद ही भाजपा समेत कई अनेक दक्षिणपंथी समुदायों ने इस फैसले के विरोध में आ कर प्रदर्शन किए थे।

इस से जुड़ी अन्य मामले सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी बेंच के पास भेज दिया। केरल के मंत्री कडकमपल्ली सुरेंद्रन ने अपने बयान में  साफ कह दिया है कि सबरीमाला वह जगह नहीं है जहां प्रदर्शन या आंदोलन किए जाएँ, हम ऐसी किसी भी महिलाओं को प्रोत्साहित नहीं करेंगे जो सिर्फ पब्लिसिटी के लिए सबरीमाला आए हो।

800 साल पुराना है सबरीमाला मंदिर इतिहास

सबरीमाला मंदिर करीब 800 साला पुराना है। महिलाओं के प्रवेश को लेकर इसमें विवाद चला ही आ रहा है और यह दिन ब दिन बढ़ता ही जा रही है। इसके इतिहास की बात करे तो भगवान अयप्पा को भगवान शिव और मोहिनी (भगवान विष्णु का रूप) का पुत्र माना जाता है।

कथाओं के मुताबिक भगवान अयप्पा ब्रह्मचारी माने जाते है। मंदिर की चली आ रही परंपरा के मुताबिक इस मंदिर में 10 से लेकर 50 वर्ष के आयु की महिलाओं और लड़कियों का प्रवेश वर्जित है।

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