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स्नान करने से होती है ग्रहों की अशुभता दूर

दैनिक जीवन की दिनचर्या में स्नान एक बहुत ही अभिन्न अंग है। स्नान करने से जहां तन की सफाई होती है वही मन को ऊर्जा व शान्ति भी प्राप्त होती है। स्नान एक ऐसी क्रिया है जिसके द्वारा पूरा शरीर बहुत पवित्र हो जाता है। क्या आप जानते है कि स्नान किस प्रकार किया जाना चाहिए। स्नान करते समय पहले पानी सिर पर अवश्य डालना चाहिए उसके बाद पूरे शरीर पर क्योंकि हमारा ब्रहम स्थान होता है। इसलिए पहले उसको जल का स्नान कराना बहुत शुभ होता है।

कभी भी किसी को नग्न होकर नहीं नहाना चाहिए। ऐसा करने से जल देवता नाराज हो जाते है। जिसके कारण परिवार पर आए दिन संकट के साथ आर्थिक समस्या भी बनी रहती है। अगर आप किसी पवित्र जगह पर नहाने गए है तो नहाने से पूर्व नदी के पानी पर तर्जनी अंगुली से ऊॅ लिखे और उसके बाद डुबकी लगाना से अधिक पुण्यकारी होता है।

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उसी प्रकार से घर में प्रतिदिन स्नान करने से पूर्व जिस पात्र में जल भरा हो, उसमें अपनी तर्जनी अंगुली से ऊॅ बनाये उसके बाद स्नान आरम्भ करें। स्नान करते वक्त ह्रीं मन्त्र का जाप करने से आप पूरे दिन उर्जावान रहते है एंव कार्यो में आने वाली बाधायें दूर होकर सफलता के मार्ग प्रशस्त होते है। यदि आपका बृहस्पति ग्रह आपको अशुभ फल दे रहा है तो आप नहाने वाले पानी में एक चुटकी हल्दी मिलाकर स्नान करें।

ऐसा करने से धीरे-धीरे गुरू ग्रह की अशुभता दूर हो जाती है। ऑफिस में आर रही समस्याओं को दूर करने के लिए अपने नहाने वाले पानी में 1 घण्टे पहले 4 लौंग डाल दें उसके बाद स्नान प्रारम्भ करें। नहाने के पश्चात सभी लौंगे पूरे दिन में धीरे खा जायें। यह उपाय आपको 40 दिन तक करना है। अगर आप अवसाद में हो या फिर किसी नकारात्मक उर्जा का शिकार हो तो अपने नहाने वाले जल में एक नींबू निचोड़ स्नान करना चाहिए। यह उपाय कम से कम 40 दिन तक करने से आप तनावमुक्त होकर जीवन जीयेंगे।

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