भारत और अमेरिका के बीच हुआ BECA समझौता, जानें क्या हैं इसके मायने

भारत और अमेरिका ने दिल्ली में हुई दो दिवसीय टू प्लस टू वार्ता में BECA समझौता (बेसिक एक्सचेंज एंड कोऑपरेशन एग्रीमेंट) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इसके तहत अब दोनों देशों को सूचनाओं को साझा करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा भी कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किये जाने की संभावना हैं। BECA समझौते पर रक्षा मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव जीवेश नंदन ने भारत की तरफ से हस्ताक्षर किए हैं। इसपर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने खुशी व्यक्त की।

राजनाथ सिंह ने कहा कि हमें खुशी है कि हमने BECA (बेसिक एक्सचेंज एंड कोऑपरेशन एग्रीमेंट) पूरा कर लिया है, इससे सूचनाएं साझा करने के नए रास्ते खुलेंगे। बेका से भारत मिसाइल हमले के लिए विशेष अमेरिकी डेटा का इस्तेमाल कर सकेगा। इसमें किसी भी क्षेत्र की सटीक भौगोलिक लोकेशन होती है।

BECA से जुड़ी जरूरी बातें

  • BECA भारत के साथ अमेरिका का चौथा और अंतिम ‘मूलभूत’ करार है।
  • दोनों देशों ने सैन्य सूचनाओं के आदान-प्रदान और सुरक्षित संचार व्यवस्था को बनाने के लिए पहले ही जनरल सिक्योरिटी ऑफ मिलिट्री इंफॉर्मेशन एग्रीमेंट (2002), लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (2016), कम्युनिकेशंस कम्पेटिबिलिटी एंड सिक्योरिटी एग्रीमेंट (2018) पर हस्ताक्षर किए हैं।
  • BECA गोपनीय भू-स्थानिक डेटा के साथ-साथ महत्वपूर्ण सैन्य अनुप्रयोगों वाली अहम जानकारी तक भारत को पहुंच प्रदान करेगा। इसके तहत दोनों देश मानचित्र, समुद्री और वैमानिकी चार्ट, वाणिज्यिक और अन्य अवर्गीकृत इमेजरी, भूभौतिकीय, भू-चुंबकीय और गुरुत्वाकर्षण डेटा का आदान-प्रदान करेंगे।
  • यह समझौता अमेरिका को उपग्रह और सेंसर से लिया गया संवेदनशील डेटा साझा करने की अनुमति देगा, जो भारत को बेहद सटीकता के साथ सैन्य लक्ष्यों को देख पाने में मदद करेगा। इसके अलावा भारत हिंद महासागर में चीनी युद्धपोतों के आवागमन या अन्य हरकतों पर कड़ी नजर रख सकेगा।
  • पाकिस्तान के मामले में देखा जाए तो अगर कभी बालाकोट की तरह एक और हवाई हमला होता है, तो भारत ऐसे लक्ष्यों को सफलतापूर्वक नष्ट किए जाने की अमेरिका के उपग्रह और अन्य माध्यम से मिलने वाले डाटा से पुष्टि कर सकेगा। भारत सरकार ने कहा है कि इस समझौते पर हस्ताक्षर से दोनों देशों के सशस्त्र बलों के बीच संबंध और भी घनिष्ठ हो जाएंगे।

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