रोजगार नहीं मिला तो फिर से बिहार से चले परदेश

कोरोना जैसे महामारी के दौरान लगे लॉकडाउन के कारण देश के कोने-कोने से बिहार पहुंचे मजदूरों का परदेश जाना एकबार फिर से शुरू हो गया है। बिहार के अधिकांश जिलों से काम की तलाश में मजदूर वर्ग का एकबार फिर से रिवर्स माइग्रेशन शुरू हो चूका है। जो मजदूर जहाँ से आए थे फिर से काम के तलाश मे वापस जाने लगे है।

तमिलनाडु से आयी विशेष बस से करीब 40 की संख्या में बाँका जिले से मजदूर तमिलनाडु के तिरपुर लौटे। अपने घर को छोड़कर वापस जाने को मजबूर मजूदरों ने कहा कि कोरोना से ज्यादा चिंता बेरोजगारी है। हमें भूखे मरने की नौबत आ गयी है। जो मजदूर 22 मार्च के बाद से घर लौटे थे, वे फिर से अपने राज्य को छोडकर वापस नहीं जाने का मन बना चुके थे। लेकिन यहाँ कोई रोजगार नहीं मिलने से की वजह से घर का खर्च भी नहीं चला पा रहे है।

वापस लौटने को मजबूर ये मजदूर प्रशाशन और सरकार के तरफ से रोजगार मिलने के झूठी तस्सली से परेशान है। अब उनके पास वापस दूसरे राज्यों मे काम ढूँढने जाने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है। लाचार और बेबस ये मजदूर अपने और अपने परिवार के पेट पालने के लिए कोरोना की चिंता किए बगैर फिर से वापस वही जा रहे है जहां से उन्हे आने मे कितना परिश्रम करना पड़ा था। बाँका के कटोरिया के भालुवाकुरा के विपिन यादव, विकास यादव सहित हिन्दोलावारण के जयप्रकाश, डुमरिया के अजय और गजेंद्र ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान घर लौटने पर वापस नहीं जाने की कसम खाई थी लेकिन अब जाना मजबूरी बन गई है। ऐसे ही कमोबेश हालत सभी जिलो के मजदूरों की है।

वापस परदेश जाने वाले मजदूरो का कहना है की उनके घर मे वही कमाने वाले है । उनके नहीं कमाने से उनके घर मे चूल्हा भी नहीं जल पा रहा है ।