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World Tourism Day: भारत का सबसे डरावना पर्यटन स्थल, दोपहर में भी जाने से डरते हैं लोग

भानगढ़ कि़ला भारत की सबसे डरावनी जगहों में से एक मानी जाती है। यह राजस्थान, अलवर के राजगढ़ तहसील में स्थित है। इसे भुतहा किला भी कहा जाता है।  इतिहास में दर्ज तथ्यों के अनुसार इस किले को आमेर के कच्छवाहा शासक राजा भगवंत दास ने 1573 में बनवाया था। 

किले का निर्माण करने वाले शासक

माधो सिंह के सुजान सिंह, छत्र सिंह, तेज सिंह नामक तीन पुत्र थे माधो सिंह के बाद छत्र सिंह भानगढ़ का शासक हुआ। छत्र सिंह के पुत्र अजब सिंह थे। अजब सिंह ने अपने नाम पर अजबगढ़ बसाया था। अजब सिंह के पुत्र काबिल सिंह और इनका बेटा जसवंत सिंह अजबगढ़ में रहे। यह जगह आज भी सबसे खतरनाक जगहों के रूप मे जानी जाती है। यहां शाम पांच बजे बाद रुकने की इजाजत नहीं है, जगह, जगह प्रशासन की तरफ से साइन बोर्ड लग रहे हैं।

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किले से जुड़ी कथा

इस किले को मानसिंह के भाई माधो सिंह ने बाद में अपने रहने का ठिकाना बना लिया था। इस जगह के वीरान होने के पीछे कई कथाएं प्रचलित हैं। एक कथा में यह कहा जाता है कि भानगढ बालूनाथ योगी की तपस्या स्थल था। योगी ने अपनी तपस्या में विधान नहीं पडऩे की शर्त पर यहां किले के निर्माण की इजाजत दी थी, लेकिन राजा के वंशज इस शर्त को  नहीं कर सके और उनके द्वारा तय किए गए नियम पूरे नहीं कर सके और  उन्होंने इस किले के ध्वस्त होने का श्राप दे दिया और यह किला ध्वस्त हो गया जो आज तक ऐसा है।

यह कथा भी प्रचलित है

जबकि दूसरी कथा में यह कहा गया है कि भानगढ़ की राजकुमारी रत्नावती पर एक तांत्रिक मोहित था, लेकिन सभी प्रयासों बावजूद उसे पा ना सका, मरते-मरते वो तांत्रिक राजकुमारी और भानगढ़ रियासत को श्राप दे गया जिसके बाद से भानगढ़ किला तहस नहस हो गया। 

शाम होने से पहले रवाना हो जाते हैं पर्यटक

इस जगह को देखने हर रोज सैकड़ों पर्यटक आते हैं, लेकिन, शाम होने से पहले यहां से रवाना हो जाते हैं। लोगों के बीच में इस जगह को लेकर कई दहशत भरी भ्रांति फैली हैं, जिसकी वजह से लोग यहां आने के नाम से ही डरते हैं। यहां जगह जगह साइन बोर्ड भी लगे हैं कि यहां रात को पांच बजे बाद रुकना वर्जित हैं।

डर से जुड़ी प्रचलित कहानियां

किले के बारे में अलग अलग कई कहानियों में प्रचलित है कि यहां पांच बजे बाद सब कुछ उल्टा हो जाता है ओर किले का अगर प्रारूप भी देखा जाए तो किला औंधा दिखाई देता है। कहा जाता है कि अगर यहां शाम ढलने के बाद रूकते हैं तो कुछ भी अनर्थ हो सकता है। यहां दिन दहाड़े भी इक्का दुक्का लोग ही दिखाई देते हैं जबकि शाम पांच बजे बाद तो स्थानीय निवासी भी अपने अपने घर को चले जाते हैं। जबकि वहां मौजूद सुरक्षा कर्मी भी सभी पर्यटकों को रवाना करके वहां से चला जाता है।

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