बिहार चुनाव: हार-जीत तय करेगा OBC-EBC फैक्टर, दलों के लिए ये है बड़ी चुनौती

बिहार के इस बार के विधानसभा चुनाव काफी रोचक होने वाले हैं। चाहे कोई भी दल कितना भी प्रयास कर लें, लेकिन बिहार में पिछड़ी (ओबीसी) और अति पिछड़ी जातियों (ईबीसी) के वोट बैंक में सेंध लगा पाना किसी भी दल के लिए आसान नहीं होगा। राज्य में इन दो समूहों की आबादी करीब 51 फीसदी है। ऐसे में चुनाव इन वर्गों के वोट पर काफी मायने रखते हैं। बिहार के जातीय समीकरण अन्य राज्यों के मुकाबलों में काफी ज्यादा उलझे हुए और कठिन होते हैं।

प्रदेश में सभी राजनैतिक दलों की नजर 51 फीसदी के इस वोट बैंक पर रहती है। जातीय राजनीति करने वाले दल काफी हद तक कांग्रेस-भाजपा जैसे बड़े दलों के वोट बैंक में सेंध लगाने में काफी हद तक कामयाब रहते हैं। इस 51 फीसदी में से एक बड़ा हिस्सा जिस दल के पक्ष में जाएगा, उसके लिए सत्ता पाना आसान नहीं होगा। पिछली बार महागठबंधन में हर दल का समावेश था, जिस वजह से उसे जीत मिली। लेकिन इस बार स्थितियां पहले से काफी अलग हैं.

जदयू के भाजपा के साथ होने, लोजपा के अलग मैदान में उतरने, मुस्लिम एवं दलित रुझान वाले दलों जैसे एमआईएम और बीएसपी आदि के गठबंधन ने इन मतों के विभाजित होने का खतरा पैदा कर दिया है। राज्य में ओबीसी और ईबीसी की आबादी करीब-करीब बराबर 26-26 फीसदी और 15 फीसदी सवर्ण हैं।

यह भी पढ़े: 14 महीने बाद रिहा हुई महबूबा मुफ्ती, कहा-नहीं भूली बेइज्जती, जारी रहेगा संघर्ष
यह भी पढ़े: भारत में कोरोना अपने ढलान पर, आंकड़ों में देखें कैसे जंग जीत रहा है देश

Loading...