आपके सेहत के लिए बोतलबंद पानी है घातक

आमतौर पर हम पानी की बोतल को टैप वॉटर से सेफ मानते हैं, जोकि सही नहीं है। सेंटर फॉर साइंस ऐंड इन्वाइरनमेंट (सीएसई) के मुताबिक, पीने के पानी में पेस्टिसाइट्स की मात्रा 0.0001 मिलीग्राम प्रति लीटर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। सीएसई की 2003 में आई रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में मिलने वाली पानी की बोतलों में 36.4 गुना ज्यादा पेस्टिसाइड्स पाए गए, जबकि मुंबई में यह आंकड़ा 7.2 गुना ज्यादा था। विदेशों से इंपोर्ट होने वाली बोतलों में ऐसी कोई कमी पाई नहीं गई। तो क्या यह माना जाए कि देश में तैयार होने वाले बोतलबंद पानी में साफ पानी के स्टैंडर्ड को लागू नहीं किया जा रहा?

दूसरा सबसे बड़ा मिथ बोतलबंद पानी को ‘मिनरल वॉटर’ मानने का है। मिनरल वॉटर पहाड़ी इलाकों में कुदरती स्रोतों से पानी लिया जाता है। इसकी कीमत भी ज्यादा होती है। मसलन, हिमालयन ब्रैंड के मिनरल वॉटर का रेट 55 रुपये प्रति लीटर है। वहीं, नॉर्मल पैक्ड बॉटल में फिल्टर किया गया ग्राउंड वॉटर होता है, जिसकी कीमत औसतन 15-20 रुपये प्रति लीटर है। आमतौर पर ऐसे पानी में मिनरल नहीं होते, जबकि कई कंपनियां ऊपर से मिनरल ऐड भी करती हैं और बोतलों पर यह लिखा भी होता है।

पानी की बड़ी बोतल कितनी सेफ

कई इलाकों में पानी की सप्लाई कम होने या पानी साफ न होने की वजह से लोग पानी की 20 लीटर की बोतलें खरीदते हैं। फिलहाल 20 लीटर पानी की बोतल 40-70 रुपये में आती है। इस बड़ी प्लास्टिक की बोतल को सप्लायर कई बार इस्तेमाल करते हैं और अक्सर इन्हें ढंग से साफ नहीं किया जाता। हालांकि कुछ बड़ी कंपनियां साफ-सफाई का ख्याल रखती हैं। बोतल की गंदगी के अलावा पानी की क्वॉलिटी पर भी सवाल है। दरअसल, इन बोतलों में आरओ से साफ हुए पानी को भरा जाता है जिस पर डब्ल्यूएचओ सवाल उठा चुका है। यह सच है कि आरओ से पानी के सारे मिनरल्स निकल जाते हैं। इससे लंबे समय में शरीर की इम्यूनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो सकती है।

इस मुद्दे पर इंडियन मेडिकल असोसिएशन के सेक्रटरी जनरल  कहते हैं कि चूंकि आरओ के इस्तेमाल से मिनरल्स निकल जातें हैं, ऐसे में शरीर को जरूरी तत्व नहीं मिल पाते। लंबे अर्से में आरओ की वजह से क्या बीमारियां हो सकती है, इसका कोई डेटा मौजूद नहीं है। वैसे भी आजकल जो नई टेक्नॉलजी के आरओ आ रहे हैं, वे टीडीएस (टोटल डिसॉल्व्ड सॉलवेंट) यानी मिनरल्स के बैलेंस को बनाए रखते हैं। जिन लोगों के पास पुराने आरओ हैं, उन्हें भी डरने और घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि प्रदूषित पानी पीने से अच्छा है, आरओ से साफ किया हुआ पानी पिया जाएं।

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