कैबिनेट विस्तार पर लगी रोक तो शिंदे सरकार ने लिया बड़ा फैसला, सचिवों को सौंपी मंत्रालयों की जिम्मेदारी

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में चल रही सुनवाई के चलते महाराष्ट्र में मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं हो पा रहा है. मंत्री नहीं होने की वजह से विभागों के काम पर भी असर पड़ रहा है. जिसकी वजह से कई विकास के कार्य अटके पड़ें है. इस बीच राज्य के सीएम एकनाथ शिंदे (CM Eknath Shinde) ने बड़ा कदम उठाया है. सीएम शिंदे ने मंत्रिमंडल का विस्तार होने तक मंत्री और राज्य मंत्रियों के अधिकार सचिवों को सौंपने का फैसला किया है.

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में नई सरकार के गठन को 36 दिन से भी ज्यादा का समय हो गया है लेकिन अभी तक मंत्रियमंडल का विस्तार नहीं हो पाया है. मंत्रिमंडल नहीं बनने से गृह, राजस्व और शहरी विकास मंत्रालय समेत कई मंत्रालयों में फाइलें अटकी पड़ी हैं. इसलिए शिंदे सरकार ने मंत्रियों के सभी अधिकार सचिवों को देने का फैसला किया है. जो आदेश और फैसले मंत्रियों द्वारा लिए जाते थे, वो अब सचिव लेंगे. राज्य के मुख्य सचिव द्वारा ये आदेश जारी किया गया है.

5 अगस्त को होना था कैबिनेट विस्तार
बता दें कि 5 अगस्त को शिंदे सरकार में कैबिनेट का विस्तार होना था. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 4 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से एकनाथ शिंदे गुट की अर्जी पर कोई फैसला नहीं लेने का आदेश दिया. CJI एनवी रमना ने कहा कि 8 अगस्त को दोनों गुटों को चुनाव आयोग में दाखिल करना है. अगर कोई गुट जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगता है तो चुनाव आयोग उस पर विचार करे. CJI एनवी रमना ने साथ यह भी कहा कि वह 8 अगस्त को फैसला करेंगे कि इस मामले की सुनवाई पांच जंजों की संवैधानिक बेंच को सौंपा जाए या नहीं.

15 अगस्त तक मंत्रिमंडल विस्तार की उम्मीद
शिवसेना के बागी खेमे के विधायक उदय सामंत ने कहा कि महाराष्ट्र में मंत्रिमंडल विस्तार 15 अगस्त से पहले हो जाएगा. राज्य में नई सरकार को कार्यभार संभाले एक महीने से अधिक समय हो चुका है. मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 30 जून को शपथ ली थी और वर्तमान में उन दोनों के अलावा राज्य मंत्रिमंडल में कोई सदस्य नहीं है. सामंत ने कहा कि प्रभारी मंत्री स्वतंत्रता दिवस पर अपने-अपने जिलों में तिरंगा फहराएंगे. प्रत्येक जिले की विकास योजनाओं और संबंधित मामलों के लिए प्रभारी मंत्रियों की नियुक्ति की जाती है. यह एक अतिरिक्त जिम्मेदारी है, जो मंत्रिपरिषद के सदस्यों को दी जाती है.

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