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अर्ली ऐज में कार्डियक अरेस्ट आता है इन छोटी-छोटी वजह से

23 साल के रेडियो जॉकी की मौत कार्डिएक अरेस्ट की वजह से हुई। यह मौत उन युवाओं के लिए एक अलर्ट है, जो यह समझते हैं कि कम उम्र में हार्ट अटैक नहीं आ सकता है या केवल मोटे लोगों को ही अटैक आता है।

डॉक्टरों का कहना है कि इन दिनों 20-30 साल के युवा कार्डिएक अरेस्ट की वजह से इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। अगर कोई स्मोकर है, आरामदेह लाइफ स्टाइल जीता है, कम सोता है और दुबला-पतला भी है तो उसको भी कार्डिएक अरेस्ट आ सकता है। अचानक हार्ट अटैक में 30 पर्सेंट लोग अस्पताल पहुंचने से पहले मर जाते हैं।

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मोटापा केवल एक रिस्क फैक्टर है, स्मोकिंग और जेनेटिक कारण सबसे बड़ा रिस्क फैक्टर है। अगर कोई युवा या वयस्क सेनेटरी लाइफ स्टाइल जीता है तो उसे कार्डिएक अरेस्ट का खतरा है। मैक्स के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. विवेका कुमार का कहना है कि जो लोग तनावपूर्ण जीवन जीते हैं और स्मोकर हैं,

उनमें ब्लड क्लॉट बनने का खतरा ज्यादा रहता है। हार्ट के अंदर भी ब्लड क्लॉट बन सकता है और अचानक कार्डिएक अरेस्ट हो सकता है। अगर समय पर इलाज नहीं मिले तो मौत हो जाती है।

डॉ.  का कहना है कि अगर कोई दुबला-पतला है तो उसे भी अटैक हो सकता है। जिस प्रकार ओवरवेट एक बीमारी है,उसी प्रकार अंडरवेट भी खतरा है। इंसान की लंबाई और मोटाई के अनुसार बॉडी मास इंडेक्स होता है, एक इंसान का बीएमआई 22 से 23 के बीच में होना चाहिए। अगर यह कम है तो उन्हें कार्डिएक अरेस्ट का अधिक खतरा है। इन्हें भी सडन डेथ खतरा है।

डॉ.  का कहना है कि दुबले-पतले लोग अगर स्ट्रेस में जीएंगे, पूरी नींद नहीं लेंगे, तो उन्हें भी सडन कार्डिएक अरेस्ट होगा और इसमें 33 पर्सेंट की मौत हो जाती है। हर महीने 20 से 30 साल के बीच के एक या दो युवा कार्डिएक अरेस्ट की वजह से इलाज के लिए पहुंचते हैं।

ये ऐसे लोग होते हैं, जो नाइट शिफ्ट में काम करते हैं, सेनेटरी लाइफ स्टाइल जीते हैं, एक्सरसाइज नहीं करते हैं। डॉ. ने कहा कि सडन कार्डिएक अरेस्ट पहला अटैक होता है और इसमें ही 33 पर्सेंट की मौत हो जाती है।

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