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ज्योतिष

शूर्पणखा बनी रावण के सम्पूर्ण कुल विनाश का कारण

शूर्पणखा रोती-बिलखती लंका की ओर भागी और अपने भाई के पास जाकर बोली –अरे रावण! तेरे बल-पराक्रम को धिक्कार है| राम नामक एक आदमी ने मेरी नाक के साथ तेरी भी नाक काट दी। रावण बड़े दर्प से बोला–लेकिन शूर्पणखा! उसने तेरा अंग-भंग किया क्यों ? कौन है वह राम? दण्डक वन में वह क्यों आया? शूर्पणखा ने कहा–भैया! राम …

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काली मिर्च से मिलता है धन और प्यार

यदि आपको अपनी जिंदगी में खुशहाली लानी है और अधिक पैसे कमाने है तो आप यह उपाय करें। काली मिर्च के 5 साबूत दानें लें और इन 5 साबूत दानों को अपने ऊपर से तकरीबन 7 बार उसार लें। यह करने के बाद किसी चौराहे पर या किसी एकान्त स्थान पर जायें और इन्हें चारों दिशाओं में 4 दाने फेंक …

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राज्याभिषेक के एक दिन पहले राजा राम को मिला था 14 वर्ष का वनवास

दशरथ अपने सर्वगुणसम्पन्न पुत्र को राज्य के समस्त अधिकार सौंप देना चाहते थे । उन्होंने सभी मंत्री, बड़ों से सलाह कर राम को शीघ्र युवराज का पद देने का निश्चय कर लिया ।   राज्याभिषेक के लिए चैत्र मास में अयोध्या आने का निमन्त्रण सभी मित्र राजाओं को भिजवाया गया | राम के अभिषेक की तैयारी जोरो-शोरो से हो रही …

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सम्पूर्ण सत्य न जानना ही बना खर-दूषण की मृत्यु का कारण

  सूर्पनखा ने राम-लक्ष्मण को शादी का प्रस्ताव दिया तो दोनों के मना करने के बाद वह न वर्दास्त न कर सकी और सीता की ओर दौड़ी उसको भला-बुरा कहा । लक्ष्मण ने झपटकर तलवार से उसकी  नाक काट दी। यह जिधर से आई थी, उसी ओर चिल्लाती हुई भाग गई । खर-दूषण वध इस प्रकार हुआ–वन के मध्य भाग में …

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सीता के अपमान को न सह सकने के कारण लक्ष्मण ने काटी थी शूर्पणखा की नाक

एक समय की बात है पंचवटी में राम, लक्ष्मण, सीता तीनों कुटी के सामने चबूतरे पर बैठे थे । इतने में कहीं से एक राक्षसी आई । राम को देखते ही उसके  मन में राम के प्रति लालच आ गया वह राम को वरने की सोचने लगी ।   दानवी शूर्पणखा ने अपना परिचय सभी को दिया की मैं महाप्रतापी …

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पग स्पर्श से तारी थी श्री राम ने अहिल्या

तड़का वध के पश्चात विश्वामित्र राम, लक्षमण को  एक सुन्दर तपोवन सिद्धाश्रम में ले गए । (सिद्धाश्रम एक तपोभूमि है, जहां ऋषि वामन ने तप किया था)|   विश्वामित्र ने उसी दिन यज्ञ आरम्भ कर दिया । वह कई दिनों तक लगातार चलता रहा, उस यज्ञ में  एक क्षण के लिए भी विश्राम लिए बिना दोनों राम, लक्षमण ने यग्य की रक्षा …

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माँ सिद्धिदात्री ही भगवान् शिव के अर्धनारीश्वर रूप को करती हैं पूर्ण

माँ दुर्गाजी की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री हैं। नवरात्र  के नौवें दिन इनकी उपासना की जाती है| माँ सिद्धिदात्री सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं। है। इनका वाहन सिंह है। माँ सिद्धिदात्री ही भगवान् शिव के अर्धनारीश्वर रूप को पूर्ण करती हैं इसलिए माँ को “अर्धनरेश्वर” के नाम से भी जानते है| माँ दुर्गा के इस स्वरुप के …

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इस बार दशहरे पर राफेल के साथ शस्त्र पूजा करेंगे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह फ्रांस में लड़ाकू विमान राफेल के साथ ही शस्त्र पूजा भी करेंगे। गृहमंत्री रहते हुए उन्होंने हर साल शस्त्र पूजा की। पिछले साल भी राजनाथ सिंह ने बीएसएफ के जवानों के साथ बीकानेर में शस्त्र पूजा की थी। फ्रांस यात्रा के दौरान राजनाथ सिंह राफेल विमान लेने के बाद फ्रांसीसी सरकार के अधिकारियों के साथ …

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निसंतान दशरथ को अग्नि देव के आशीर्वाद से प्राप्त हुई थी संतानें

कोसल देश के शासक राजा दशरथ बड़े ठाट से सुयोग्य मन्त्रियों व ऋषि-मुनियों की सहायता से धर्मनुसार राजकाज चलाते थे । राजा दशरथ को सभी सुख होते हुए भी उन्हें जो सुख नही था, वह था संतान का ।  उन्हें किसी वस्तु की कमी नहीं थी, फिर भी राजा को अपना जीवन फीका लगता था। राजा दशरथ के तीन रानियां …

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इस प्रकार राजा राम ने किया था तड़का का वध

अयोध्या के राजा के  चारों कुमार राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न सुशिक्षित और नवयुवक हुए। तभी महार्षि विश्वामित्र राजा दशरथ के भवन में आये और प्रसन्न होकर बोले–राजन्! हम एक विशेष प्रयोजन से आपके पास आए ।   हम सभी ऋषिगण वैज्ञानिक गतिविधियों को पूर्ण करने के लिए हवन कर रहे है। लेकिन महाबली मारीच और सुबाहु–बार-बार उसमें विघ्न डाल देते …

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