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ज्योतिष

अष्टमी के दिन सुहागन स्त्री माँ महागौरी को करती है चुनरी अर्पण

माँ भगवती की आठवीं शक्ति का नाम माँ महागौरी है। दुर्गापूजा के आठवें दिन महागौरी की उपासना का विधान है। इनकी मुद्रा अत्यंत शांत-सरल मनमोहक है। माँ महामाई महागौरी अत्यंत  करूणामयी, स्नेहमयी, और मृदुल हैं।   गौर वर्ण माँ की उपमा शंख, चंद्र और कुंद के फूल से दी गई है।इनके समस्त वस्त्र एवं आभूषण  श्वेत हैं। इनका वाहन वृषभ …

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माँ कालरात्रि की कृपा से उनके साधक हो जाते है सर्वथा भय-मुक्त

माँ भगवती की सातवीं शक्ति माँ “कालरात्रि” के नाम से जानी जाती हैं।नवरात्री के सातवें दिन माँ कालरात्रि की उपासना की जाती है। माँ कालरात्रि का स्वरूप भयानक है, लेकिन ये सदैव अपने भक्तों को  शुभ फलदायनी हैं। इसी कारण इनका नाम ‘शुभंकारी’ भी है। इस दिन साधक का मन ‘सहस्रार’ चक्र में स्थित रहता है। उनके साक्षात्कार से वह …

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विवाह मे विलम्ब कन्याओ को करनी चाहिए माँ कात्यायनी की उपासना

नवरात्रि के छठे दिन माँ ‘कात्यायनी’ की आराधना की जाती है। कात्यायनी नाम गौरी, काली,  भद्रकाली, हेेमावती,  नाम माँ पार्वती के ही है। आदिशक्ति देेव हुई थीं , जिन्होंने देवी पार्वती द्वारा दी गई सिंह पर आरूढ़ होकर महिषासुर का वध किया। वे शक्ति ही आदि रूपा है, योगसाधना में इस दिन साधक का मन “आज्ञा चक्र” में स्थित होता …

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कमल आसन पर विराजमान स्कन्दमाता करती है अपने भक्तों के कष्टों को दूर

नवरात्रि के पाँचवे दिन स्कंदमाता की उपासना की जाती है। संपूर्ण मनोरथों को पूर्ण करने वाली वरदयानी माता अपने भक्तों की समस्त मनोकामना को पूर्ण करती है।  भगवान स्कंद की माता होने के कारण माँ भगवती को स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है। माँ की चार भुजाएँ हैं। इनके दाहिनी तरफ की नीचे वाली भुजा में कमल पुष्प है। …

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माँ कूष्माण्डा की उपासना मनुष्य को सारी व्याधियों से ले जाती है दूर

चतुर्थी के दिन नवरात्रि के माँ कुष्माण्डा देवी की उपासना की जाती है। आज के दिन मां को पूर्ण पवित्र और अचंचल कर कूष्माण्डा देवी की पूजा-उपासना करनी चाहिए। इनका वाहन सिंह है।   माँ  कुष्मांडा की आठ भुजाएँ हैं। ये अष्टभुजा देवी के नाम से भी विख्यात हैं। इनके सात हाथों में क्रमशः कमंडल, बाण, कमल-पुष्प, घनुष, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा है। आठवें …

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51 शक्तिपीठ जहाँ माँ सती के अंगो के चिन्ह आज भी है उपस्थित

माँ जगतजननी की महिमा सबसे निराली है|भगवान शिव जब माँ सती का देह लेकर तांडव कर रहें थे उस समय सभी देवताओं को चिंता सताने लगी| तभी  भगवान विष्णु के चक्र ने माँ सती के देह के विच्छेद किया व महाकाल के तांडव के  समय  माँ की देह के अंग ने अलग-अलग जगह अपना स्थान लिया| आज भी माँ का …

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समस्त पाप और बाधाएँ को नष्ट करती है माँ चंद्रघंटा

माँ जगदम्बा जगत-जननी की तीसरी शक्ति का नाम चंद्रघंटा है। नवरात्रि उपासना में सारे दिन का अपना महत्व है वही तीसरे दिन की पूजा का भी अत्यधिक महत्व है इस दिन साधक का मन ‘मणिपूर’ चक्र में प्रविष्ट होता है। माँ चंद्रघंटा की कृपा से अलौकिक वस्तुओं के दर्शन होते हैं, विविध प्रकार की दिव्य ध्वनियाँ सुनाई देती हैं। माँ का यह …

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ब्रह्मचारिणी: कुंडलिनी शक्ति को जागृत करने के लिए करते हैं साधना

दूसरे दिन नवरात्री में माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है। “ब्रह्म” का अर्थ है तपस्या और “चारिणी” का अर्थ है आचरण करने वाली, “ब्रह्मचारिणी” का अर्थ है तप का आचरण करने वाली। इनके दाहिने हाथ में जप की माला एवं बाएँ हाथ में कमण्डल रहता | इस दिन साधक कुंडलिनी शक्ति को जागृत करने के लिए भी साधना करते हैं। दधाना …

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माँ सती को भुगतनी पड़ी थी अपने ज़िद्द करने की सजा

कैसे बने शक्तिपीठ:-    देवी माता के 51 शक्तिपीठों के बनने के पीछे काफ़ी पौराणिक कथा प्रचलित है। जगदम्बिका माता ने राजा प्रजापति दक्ष की पुत्री के रूप में  सती नाम से जनम लिया था| सती भगवान शिव से प्रेम करती थी और बहुत जतनो के बाद माँ सती का विवाह भगवन शिव से हो गया|     एक बार …

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देवी दुर्गा के नौ स्वरूप में प्रथम जानी जाती हैं माँ ‘शैलपुत्री’ के नाम से

देवी दुर्गा के नौ स्वरूप में प्रथम माँ ‘शैलपुत्री’ के नाम से जानी जाती हैं| माँ के शैलपुत्री’ नाम की भी कहानी है| पर्वतराज हिमालय  के घर जन्मी माँ ने पुत्री रूप में हिमालय के घर जनम लिया | इसी कारण माँ का नाम  ‘शैलपुत्री’ पड़ा।  पहले नवरात्रा में माँ के इन्हीं रूप की पूजा और उपासना की जाती है। अपने पूर्व …

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