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शुद्ध पेयजल के लिए 1000 करोड़ रुपये खर्च करेगी केंद्र सरकार

राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम (एनआरडीडब्ल्यूपी) में सुधार की जरूरत और स्वजल योजना के लिए एक रोडमैप तैयार करने पर विचार-विमर्श करने के लिए राजधानी में एक राष्ट्रीय विचार-सभा का आयोजन किया गया। केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री  उमा भारती ने विचार-सभा की अध्यक्षता की। इस मौके पर केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता राज्यमंत्री रमेश जिगजिनागी भी मौजूद थे।

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इस सभा में 13 राज्यों- असम, बिहार, गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू एवं कश्मीर, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, नगालैंड, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के पेयजल मंत्रियों ने हिस्सा लिया और अपने-अपने राज्यों में लागू की जा रही केंद्र-प्रयोजित पेयजल योजनाओं में जरूरी सुधार पर अपने विचार रखे।

केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री उमा भारती ने घोषणा की कि देश के 115 आकांक्षी जिलों में स्वजल योजना पर मौजूदा एनआरडीडब्ल्यूपी बजट से 700 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इस योजना के तहत सौर ऊर्जा की मदद से गांवों में पाइप के जरिए पेयजल की आपूर्ति की जाएगी।

स्वजल इकाइयों के संचालन और रख-रखाव के लिए सैकड़ों ग्रामीण तकनीशियनों को प्रशिक्षित किया जाएगा। भारती ने देश के आकांक्षी जिलों में दूर-दराज के गांवों में स्वजल की प्रासंगिकता के बारे में भी बताया।

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केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री उमा भारती ने देश भर में फैले 2000 जल गुणवत्ता जांच प्रयोगशालाओं का आधुनिकीकरण किए जाने की भी घोषणा की।  भारती ने राज्यों से आए मंत्रियों से जल प्रयोगशालाओं के कामकाज पर बारीक नजर रखने का आग्रह किया ताकि ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल सुनिश्चित किया जा सके।

उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय जल गुणवत्ता सब मिशन (एनडब्ल्यूक्यूएसएम) के तहत देशभर के आर्सेनिक और फ्लोराइड प्रभावित 27,544 आवासों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने की जरूरत को पूरा करने के लिए 1000 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।

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उन्होंने वर्षा जल संचयन और जल संरक्षण की अहमियत बताते हुए कहा कि इस बारे में लोगों में जागरुकता फैलाने के लिए एक विशेष संचार अभियान चलाया जाएगा। इसके साथ ही सुश्री भारती ने राज्यों से वर्ष 2030 तक सतत विकास लक्ष्य ‘सभी के लिए शुद्ध पेयजल’ सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

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