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केंद्र सरकार के इस फैसले से 900 कैदियों के जीवन में आई बहार, रिहाई मिली

केंद्र सरकार के अहम फैसले के बाद 900 कैदियों को रिहा किया जा चुका है। केंद्र सरकार ने तीन चरणों (02 अक्टूबर, 2018, 06 अप्रैल, 2019 और 02 अक्टूबर, 2019) कैदियों को रिहा करने का फैसला लिया था।

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पहले चरण में राज्यों और संघ शासित प्रदेशों ने सक्षम अधिकारियों की मंजूरी के बाद 900 से अधिक कैदियों को रिहा कर दिया। दूसरे और तीसरे चरण में कैदियों को क्रमश: 6 अप्रैल, 2019 और 02 अक्टूबर, 2019 को रिहा किया जाएगा।

राज्यों और संघ शासित प्रदेशों को सलाह दी गई है कि वे सभी जेल परिसरों में कैदियों की रिहाई के लिए तय तारीख से पहले महात्मा गांधी की शिक्षाओं पर आधारित विशेष समारोह एक सप्ताह तक आयोजित करें।

कैदियों को महात्मा गांधी की प्रतिमा तक ले जाया जाए, जहां वे उस पर श्रद्धासुमन अर्पित करें। कैदियों को रिहा करते समय उन्हें महात्मा गांधी से जुड़ी पुस्तकें उपहार में दी जाए और उन्हें उचित सलाह दी जाए।

ऐसे कैदी होंगे रिहा

55 वर्ष और उससे अधिक उम्र की महिला कैदी जिन्होंने अपनी पूरी सजा की अवधि का 50 प्रतिशत सजा काट ली है।

55 वर्ष और उससे अधिक उम्र के ट्रांसजेंडर जिन्होंने अपनी वास्तविक सजा की अवधि का 50 प्रतिशत सजा काट ली है।

60 वर्ष और उससे अधिक उम्र के पुरूष जिन्होंने अपनी वास्तविक सजा की अवधि का 50 प्रतिशत सजा काट ली है।

दिव्यांग/शारीरिक रूप से असक्षम कैदी, जो 70 प्रतिशत दिव्यांग हैं और जिन्होंने अपनी वास्तविक सजा की अवधि का 50 प्रतिशत सजा काट ली है।

लाईलाज बीमारी के शिकार कैदी

ऐसे कैदी जिन्होंने अपनी वास्तविक सजा की अवधि का दो तिहाई (66 प्रतिशत) सजा काट ली है।

विशेष माफी योजना उन कैदियों के लिए उपलब्ध नहीं है, जिन्हें अपराध के लिए मृत्युदंड दिया गया है अथवा मृत्युदंड को आजीवन कारावास में बदल दिया गया है। इनमें गंभीर और जघन्य अपराधों जैसे पोटा, यूएपीए, टाडा, एफआईसीएन, पोक्सो कानून, मनी-लॉन्ड्रिंग, फेमा, एनडीपीएस, भ्रष्टाचार निरोधक कानून आदि में शामिल कैदी आते हैं।

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