बिजली क्षेत्र में चीन की टूटेगी कमर, आत्मनिर्भर भारत के तहत हुआ बड़ा फैसला

प्रधानमंत्री मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान ने चीन को बड़े-बड़े झटके दिए हैं। इसी कड़ी में इसी अभियान के चलते चीन को एक और बड़ा नुकसान होने वाला हैं। दरअसल, भारत का ऊर्जा मंत्रालय महत्वपूर्ण ऊर्जा और प्रसारण उपकरण बनाने के लिए पूरे देश में तीन विनिर्माण केंद्र स्थापित करेगा। ऐसे में देश में स्वदेशी उपकरण बनाये जा सकेंगे। बता दे भारत चीन समेत कई देशों से ऊर्जा और प्रसारण उपरकरण आयात करता है, जिसमें बड़ी राशि खर्च होती हैं।

ऊर्जा मंत्रालय के अधिकारियों का कहना हैं कि वाणिज्यिक खुफिया महानिदेशालय (DGCI) के अनुसार, 2018-2019 में भारतीय बिजली क्षेत्र ने 71,000 करोड़ रुपये के उपकरणों का आयात किया, जिनमें से 21,235 करोड़ रुपये का आयात चीन से हुआ था। ऐसे में अब देश में ही कई उपकरण निर्मित किये जाने की तैयारी की जा रही हैं। चीन से आत्मनिर्भर होने और आयात में कटौती करने के लिए ऊर्जा मंत्रालय ने दो तरह की सूचियां तैयार की हैं।

पहली या अनिवार्य सूची में 239 वस्तुएं हैं, जिसमें भारत के निर्माण की क्षमता शून्य है, इसलिए विनिर्माण समय आने तक आयात पर निर्भर रहना चाहिए। वहीं, दूसरी या एम्बारगो सूची में 95 वस्तुएं हैं जो भारत में निर्मित होने के बावजूद बिजली क्षेत्र द्वारा चीन समेत अन्य दूसरे देशों से आयात की जाती रही हैं।

बिजली क्षेत्र में भारत का वार्षिक चीनी आयात

17,289 करोड़ रुपये (2009-2010)
22,114 करोड़ रुपये (2010-2011)
34,000 करोड़ रुपये (2011-2012)
29,062 करोड़ रुपये (2012-2013)
22,679 करोड़ (2013-2014)
19,658 करोड़ (2014-2015)
19,301 करोड़ (2015-2016)
19,757 करोड़ रुपये (2016-2017)
19,682 करोड़ रुपये (2017-2018)

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