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अल्मोड़ा के न्याय देवता, जहां चिट्ठियां लिख कर लगाई जाती है न्याय की पुकार

उत्तराखंड राज्य के कुमाऊं अर्थात कुमांचल क्षेत्र में चितई गोलू देवता कुमाऊं को न्याय देवता माना जाता है। भारत में प्राचीन परंपरा के अनुसार  प्रत्येक वस्तु तथा स्थिति को देवता के अस्तित्व से जोड़कर देखा जाता हैं। यहां उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र के अल्मोड़ा में एक छोटा पर बहुत ही महत्वपूर्ण मंदिर है। यह मंदिर गोलू देवता का मंदिर है।

गोलू देवता को भगवान शिव का अवतार माना जाता है। गोलू देवता, गोरे भैरव माने जाते हैं। यह प्रमुख भैरव से अलग सफेद रंग के होते हैं और सफेद घोड़े की सवारी करते है। इन्हें हमेशा न्याय करने के लिए पुकारा जाता है ।  कुमाऊ पहाड़ी पर इन्हें इष्ट देवता और कुल देवता माना जाता है। माना जाता है कि अगर कोई सच्ची श्रद्धा, विवेक,  के साथ इनसे कुछ मांगे तो वह जरूर पूरा होता है।

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यह मंदिर चारो तरफ  से चीड़ के वृक्षों से घिरा हुआ है। और यहां हमेशा बंदरों का निवास रहता रहता है। एक विशेष और जागृत मंदिर है। मंदिर की ओर जाते समय इ्सकी चौड़ी गलियारे में ना जाने कितनी ही पीतल की घंटियां लटकी हुई है। और साथ ही लाल रंग की चुनरी घंटियों में बंधी हुई दिखाई देती है। यहां बहुत ही विशाल घंटा भी लटका हुआ है और वह जिस तोरण से लटका हुआ उसमें भी कई सारी घंटियां बंधी रहती हैं।

यहां पर बहुत सारी हाथ से लिखी चिट्ठियां भी टंगी रहती है। मंदिर की छत पर अनगिनत चिट्टियां देखी जा सकती हैं। वहीं मंदिर की दीवारों पर कई स्टांप पेपर भी लटकाए गए दिखाई देते हैं। चीटियों को पढ़ने से पता चलता है इसमें घर, गृहस्ती, रोजगार, स्वास्थ्य, संपत्ति से संबंधित कई तरह की समस्याएं लिखी गई होती है। यह गोलू देवता को लोगों द्वारा लगाई गई याचिका है। माना जाता है इन चिट्ठियों पर लिखित संदेश के अनुसार गोलू देवताओं  निर्णय लेते हैं। इसीलिए इन्हें न्याय का देवता कहा जाता है।

ये मंदिर हमेशा लोगों से भरा रहता है। यहां घंटियां बांधना, चुनरी बांधना और अपने हाथ से लिखी गई अपनी समस्याएं चिट्ठी के रूप में समर्पित करने का नियम है। जिसके आधार पर लोगों की मान्यता है कि गोलू देवता उनके साथ न्याय करते हैं।

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