ब्रेस्टफीडिंग से जुड़े मिथ को कीजिये क्लियर

इस बात में कोई दोराय नहीं है कि ब्रेस्ट फीडिंग शिशु के लिए अमृत समान है लेकिन ऐसी बहुत सी भ्रांतियां हैं, जिसे आज भी लोग सच मानते हैं। तो चलिए आज हम आपको इस बारे में बताते हैं-

कुछ महिलाएं मानती हैं कि अगर उनके ब्रेस्ट का साइज छोटा है तो इसके कारण शिशु को पर्याप्त मात्रा में दूध नहीं मिल पाता। जबकि वास्तव में यह बिल्कुल गलत है। ब्रेस्ट के साइज का दूध से कोई संबंध नहीं है। अगर मां स्वस्थ है तो शिशु को पर्याप्त दूध मिलने में कोई प्रॉब्लम नहीं होती।

यह तो हर कोई जानता है कि स्तनपान बच्चे के लिए काफी अच्छा है, लेकिन वहीं यह ब्रेस्ट फीडिंग मां के लिए भी उतना ही लाभकारी है। इतना ही नहीं, स्तनपान करवाने से महिलाओं में कैंसर का खतरा भी काफी हद तक कम हो जाता है।

कुछ महिलाएं स्तनपान करने से महज इसलिए बचती हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि स्तनपान करवाने से ब्रेस्ट साइज में फर्क पड़ जाता है। यह केवल एक मिथ है। स्तनपान से ब्रेस्ट साइज में कोई फर्क नहीं आता है बल्कि इससे मां और शिशु दोनों स्वस्थ रहते हैं।

मां के पहले दूध में गंदगी होती है। इसलिए अधिकतर महिलाएं मानती हैं कि जन्म के तुरंत बाद शिशु को फीड नहीं कराना चाहिए। अगर आप भी ऐसा सोचती हैं तो आप वास्तव में अपने बच्चे की सेहत को काफी नुकसान पहुंचा रही है। वास्तव में डिलिवरी के बाद का दूध शिशु के लिए सबसे फायदेमंद होता है। क्योंकि उसमें कोलोस्ट्रम नामक ऐसा तत्व होता है, जो शिशु के इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है।