किसानों से बातचीत के लिए बनाई गई कमेटी के सदस्य जज नहीं, सिर्फ राय दे सकते हैं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि लोगों को समझने में कुछ भ्रम है। समिति का हिस्सा होने पहले एक व्यक्ति की कोई राय हो सकती है, लेकिन उसकी राय बदल भी सकती है।

एक मामले के सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि एक व्यक्ति ने इस मामले पर विचार रखा, वह समिति का सदस्य होने के लिए अयोग्य नहीं हो सकता है।

चीफ जस्टिस ने कहा कि कमेटी के सदस्य कोई जज नहीं होते हैं। कमेटी के सदस्य केवल अपनी राय दे सकते हैं, फैसला तो जज ही लेंगे।

बता दें कि 11 जनवरी को चार सदस्यीय समिति का गठन किया था लेकिन प्रदर्शनकारी किसानों ने नियुक्त सदस्यों द्वारा पूर्व में कृषि कानूनों को लेकर रखी गई राय पर सवाल उठाए। इसके बाद एक सदस्य भूपिंदर सिंह मान ने खुद को इससे अलग कर लिया है।

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