भारत में अनिवार्य मतदान व्यवहारिक नहीं : बघेल

सरकार ने कहा है की भारत जैसे विशाल और विभिन्न भौगोलिक स्थितियों वाले देश में अनिवार्य मतदान की व्यवस्था का प्रस्ताव व्यावहारिक नहीं है।

केंद्रीय कानून और न्याय राज्यमंत्री प्रो एसपी सिंह बघेल ने लोकसभा में अनिवार्य मतदान को लेकर पेश भाजपा के जनार्दन सिंह सिग्रीवाल के निजी विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुते कहा कि विधायक ने अनिवार्य रूप से मतदान नहीं करने पर 500 रुपये जुर्माने का व्यवस्था की बात की गई है लेकिन यह सही नही है। यदि मनरेगा का काम चल रहा हो तो गरीब को रोटी चूड़कर वोट देने को बाध्य नहीं किया जा सकता है।

श्री सिग्रीवाल से विधेयक वापस लेने की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में सभी लोग अनिवार्य रूप से मतदान करें यह व्यावहारिक कम लगता है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नीति आयोग ने भी इस संबंध में विचार किया लेकिन उसने अनिवार्य मतदान की सिफारिश को स्वीकार नहीं किया। विधानसभा ने इस संबंध में विधेयक पारित किया लेकिन बाद में इस मामले में याचिका दायर हुई तो न्यायालय ने अनिवार्य मतदान की व्यवस्था संबंधी प्रस्ताव को खारिज कर दिया था।

उन्होंने कहा कि सिंगापुर, उरूग्वे, अमेरिका के जॉर्जिया में, बुल्गारिया, फीजी, साइप्रस, इक्वाडोर, फ्रांस के कुछ हिस्सों में इस तरह के प्रयास हुए है लेकिन ये प्रयोग बहुत सफल नहीं हुए और स्विट्जरलैंड, उज़्बेकिस्तान उरूग्वे सहित कई देशों ने तुरंत अनिवार्य मतदान की व्यवस्था को वापस ले लिया। उन्हें लगा कि यह व्यवस्था देशहित में नहीं है और वहां की सरकारों ने यह फैसला वापस ले लिया।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मतदान करना सभी का अधिकार है और सभी लोगों को मतदान करना चाहिए लेकिन इसे सरकारी स्तर पर अनिवार्य बनाना व्यावहारिक नहीं है। कई बार भौगोलिक परिस्थितियों के कारण भी यह उचित नहीं है। जम्मू कश्मीर, हिमाचल, अरुणाचल, उत्तराखंड जैसे राज्यों में हिमपात हो रहा हो तो तब मतदान को कैसे अनिवार्य कैसे बनाया जा सकता है। उनका कहना था कि अनिवार्य मतदान किया जाए तो इसका सबसे ज्यादा खामियाजा गरीब आदमी को भुगतना पड़ेगा। जुर्माना लगता है तो प्रवासी मजदूर के सामने एक दिन की रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। यह कैसे संभव है कि जो बिहार का श्रमिक पंजाब में काम करने गया है वह अनिवार्य वोटिंग के लिए खर्च कर मतदान के दिन बिहार लौटे।

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