‘लव जिहाद’ वाले धर्मांतरण अध्यादेश पर कोर्ट ने ‘योगी सरकार’ से मांगा जवाब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लव जिहाद की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए लाये गए धर्मांतरण अध्यादेश को रद्द करने की मांग पर दाखिल की गई याचिकाओं पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। फिलहाल के लिए कोर्ट ने अध्यादेश पर अंतरिम रोक लगाने से भी इनकार कर दिया हैं। यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर एवं जस्टिस पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने दिया हैं। याचिकाओं में अध्यादेश को गैर ज़रूरी बताया गया है और इसे रद्द करने की मांग की गई हैं।

वहीं, राज्य सरकार की तरफ से अध्यादेश को जरुरी बताया गया हैं। साथ ही कहा गया हैं कि कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिए इस तरह का अध्यादेश लाना काफी जरुरी हो गया था। कोर्ट ने राज्य सरकार को जवाब के लिए चार जनवरी तक का समय दिया है। इसके बाद याचिकाकर्ताओं को अगले दो दिनों में प्रत्युत्तर हलफनामा दाखिल करना होगा, जिस पर अगली सुनवाई सात जनवरी को होगी।

धर्मांतरण अध्यादेश के बारे में

इस अध्यादेश में एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तन के लिए संबंधित पक्षों को विहित प्राधिकारी के समक्ष उद्घोषणा करनी होगी कि यह धर्म परिवर्तन पूरी तरह स्वेच्छा से है। संबंधित लोगों को यह बताना होगा कि उन पर कहीं भी, किसी भी तरह का कोई प्रलोभन या दबाव नहीं है।

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