SC में बोली केंद्र सरकार, सांसदों, विधायकों पर दर्ज आपराधिक मामले तेजी से निपटाए जाएं

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को पूर्व और वर्तमान सांसदों और विधायकों के खिलाफ अटके पड़े आपराधिक मुकदमों को तेजी से निपटाने पर बल दिया। अदालत में केंद्र की तरफ से कहा गया कि अटके पड़े इन मामलों का निश्चित समय-सीमा में परिणाम निकालना बेहद जरुरी है। केंद्र की तरफ से यह सुझाव सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति एन.वी. रमन की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष पेश किया। जिसे अदालत ने कोई आपत्ति नहीं होने की बात कही।

मेहता ने अदालत में कहा कि यदि विधि निर्माताओं के खिलाफ लंबित मामलों में उच्च न्यायालय ने कार्यवाही पर रोक लगा रखी है। तो ऐसे में शीर्ष अदालत को इन मामलों में जल्द से जल्द निर्णय लेने चाहिए। मेहता ने कहा कि शीर्ष अदालत के निर्देशों को भारत सरकार स्वागत करेगी। अगर विशेष अदालतों में बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी कोई दिक्कत है तो शीर्ष अदालत संबंधित राज्य सरकार को अधिकतम एक महीने में जरुरी कदम उठाने को कह सकती है।

न्याय-मित्र ने अदालत में सूचित किया

  • 4442 मामलों में नेताओं पर मुकदमे चल रहे हैं। इनमें से 2556 आरोपी तो वर्तमान में सांसद-विधायक हैं।
  • 200 से ज्यादा मामले सांसदों और विधायकों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून, धनशोधन रोकथाम कानून और पोक्सो कानून के तहत।
  • एक दर्जन से ज्यादा सांसदों और विधायकों (पूर्व और वर्तमान) के खिलाफ आयकर कानून, कंपनी कानून, एनडीपीएस कानून, आबकारी कानून तथा शस्त्र कानून के तहत मामले।

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