टकराव के मूड़ में नेपाल, 200 सालों तक जिस पर कुछ नहीं बोला, अब उसी पर ठोका दावा

पाकिस्तान और चीन के बाद अब नेपाल भी भारत के सामने चुनौती बन गया है। जानकारों का कहना है कि नेपाल के साथ विवाद को हल्के में लेना भारत के लिए गंभीर हो सकता है। नेपाल का भारत के साथ सीमा विवाद संदेह की दृष्टि में इसलिए भी है क्योंकि इस वक्त भारत पहले ही चीन के साथ विवाद में उलझा है और कोरोना संकट अलग से है। ऐसे में नेपाल के विवाद की टाइमिंग कई सवाल खड़े करती है। ऐसे में नेपाल का नया फ्रंट भारत के लिए चुनौती बन गया है.

नक्शा संशोधन के पहले भारत से बातचीत का प्रस्ताव नेपाल द्वारा गंभीरता से न लेने का सीधा सा मतलब यह है कि नेपाली नेतृत्व इस समय टकराव के तेवर दिखा रहे है। बता दे नेपाल और भारत के बीच करीब 1880 किलोमीटर सीमा खुली हुई है। दोनों देशों के बीच 98 फीसदी सीमा को कवर करने वाले नक्शे पर सहमति है, लेकिन पश्चिमी नेपाल में लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा क्षेत्रों पर अभी तनाव जारी है। नेपाल लिम्पियाधुरा पर नया दावा ठोक रहा है।

नेपाल ने लिम्पियाधुरा पर 200 सालों तक कोई दावा नहीं किया। कई ऐसे क्षेत्र भी है जहां पर सीमा समझ पर कोई विवाद नहीं है। लेकिन वहां सीमांकन के लिए बनाए गए पिलर ढहाए जाने की घटनाओं से भी नेपाल की तरफ से चुनौतियां उभरकर सामने आई है।

जानकार बताते है कि नेपाल ने 1816 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेनाओं से हार के बाद अपने पश्चिमी क्षेत्र का एक हिस्सा छोड़ा था। इसके बाद सुगौली संधि ने काली नदी का उत्पत्ति स्थल भारत और नेपाल की सीमा तय हुई। लेकिन दोनों देश काली नदी के स्रोत को अलग राय रखते है। यही मामला पूरे विवाद की जड़ है।

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