हद से ज्यादा खाना बच्चों को पहुंचा सकता है नुकसान, जानिए क्यों

सामान्यतः भारत में ऐसा माना जाता है कि बच्चा जितना ज्यादा खाना खाता है वो बड़ा होकर उतना ही ज्यादा मजबूत बनता है। ये बात सही भी है। यही वजह है कि बच्चों को दूध-दही खाने की सख्त हिदायत हमेशा ही दी जाती है। लोग कुछ महीने के बच्चे को तब तक खिलाते रहते हैं जब तक वो रो कर इसके लिए पूरी तरह मना न कर दे। लेकिन इसके बावजूद भारतीय बच्चों को पूरी तरह से स्वस्थ होने का तमगा हासिल नहीं हो पाता। असल में होता ये है कि हद से ज्यादा खाने की आदत बच्चों को मोटापे की ओर ले जाती है।

भारत के मुकाबले पश्चिमी देशों में तो हालात और भी अधिक खराब हैं। यहां फास्ट फूड खाने की वजह से बहुत से बच्चे इतने मोटे हो जाते हैं कि उन्हें इलाज करवाना पड़ता है। लोग समय से पहले ही मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। सुनकर हैरानी जरूर होती है लेकिन ये बात बिल्कुल सच है कि 14-15 साल के बच्चे भी हार्ट अटैक से मर रहे हैं।

लेकिन अगर आप ये सवाल पूछते हैं कि दुनिया में सबसे स्वस्थ बच्चे कहां के हैं तो जवाब होगा जापान। जी हां, ‘द लैनसेट’ में छपी एक रिसर्च के मुताबिक जापान में जन्मे बच्चे लंबे समय तक एक स्वस्थ जीवन जीते हैं और इसका सबसे बड़ा कारण है उनके खाने की आदत। इसका मतलब ये कि जापानी इतना पौष्टिक खाना खाते हैं कि बीमारियां उनसे दूर ही रहती हैं।

जापान में लोगों में मोटापे की दर बहुत कम है

दुनिया भर के विकसित और भारत जैसे विकासशील देशों में मोटापे की समस्या लगातार बढ़ रही है। लेकिन वहीं दूसरी तरफ जापान में लोगों में मोटापे की दर बहुत कम हो गई है। इसकी वजह जेनेटिक बदलाव नहीं है बल्कि खाने-पीने और दिनचर्या में बदलाव है। पूरी दुनिया जापान से खाने-पीने की कुछ अच्छी आदतें सीख सकती है।

ज्यादा खाना खाएं लेकिन कैलोरी कम लें

मोटापे से दूर रहने का ये मतलब नहीं है कि आप खाना ही छोड़ दें बल्कि लोगों को खाने में ऐसी चीजें जोड़नी चाहिए जिनमें अधिक कैलोरी न हो। जैसे एक जापानी मील में चावल, मीट या मछली का एक हिस्सा, और कई साड़ी सब्जियां शामिल होती हैं। जापानी खाना बनाते समय इस बात का ध्यान रखते हैं कि वो एक अच्छी मील में सब कुछ शामिल कर लें। यानी उसमें निश्चित मात्रा में कार्बोहायड्रेट, फैट, प्रोटीन, विटामिन, फाइबर आदि आ जाएं। यही वजह है कि वो ‘होल फूड’ खाना पसंद करते हैं। वजह ये है कि कटे हुए और प्रोसेस्ड खाने में काफी अधिक कैलोरी होती हैं।

खाने की छोटी प्लेट का इस्तेमाल करें

हमारे यहां जितनी बड़ी प्लेट में सलाद रखा जाता है, जापानी उतनी बड़ी प्लेट में ही अपना पूरा खाना खत्म कर देते हैं।

इन जापानी आदतों को जानें

बाहर का कम खाएं

भारत में हर तीसरा बच्चा कुरकुरे खाने की जिद करता है। अक्सर आपने लोगों को यह कहते सुना होगा कि ये तो कुछ खाता ही नहीं सिर्फ चिप्स और चॉकलेट खाने की जिद करता है। असल में छोटे बच्चों की जो आदत डाली जाए वो वही खाना पसंद करते हैं। शुरु-शुरु में तो लोग बच्चों की बात मानते हैं लेकिन इसी वजह से उनकी आदत खराब हो जाती है और बड़े होकर वो जिद करने लगते हैं।

वहीं जापान के लोग कम खाना पसंद करते हैं। इसके अलावा जब भी वो कोई स्नैक खाते हैं जिसमें ज्यादा कैलोरी हो तो उसके बाद तुरंत ही एक्सरसाइज भी कर लेते हैं। इसके अलावा भले ही आप कितने भी बिजी क्यों न हों, दिन में एक बार अपने बच्चों के साथ बैठकर खाना जरूर खाएं। जापानी भी ऐसा ही करते हैं।

चावल से नुकसान नहीं

जब भी किसी को वजन कम करना होता है उसे लोग हिदायत देते हैं कि सबसे पहले तो चावल खाना छोड़ दो। लोग ये काम करते भी हैं। लेकिन सच बात तो ये है कि जापान के खाने में चावल जरूर होता है और वो उसके साथ अलग-अलग सब्जियां और मछली खाते हैं। इससे चावल खाने के बाद जो भरे पेट जैसा महसूस होता है वो दिक्कत नहीं आती।

उम्मीद है कि दुनिया भर के देश जापान से जरूर सीखेंगे। भारत में एक तरफ कुछ लोग अक्सर भूखे सोते हैं तो कुछ हद से ज्यादा खाकर अपना वजन बढ़ा रहे हैं। ऐसे में इस बात पर ध्यान देना बहुत जरूरी है कि हमारे देश के युवा मोटापे का शिकार न हों। खाने का वो हिस्सा अगर गरीबों को दे दिया जाए तो शायद समाज में एक संतुलन बना रहेगा।