ED ने कोर्ट से कहा- अर्पिता मुखर्जी की हो सकती है हत्या, जमानत पर ऑर्डर रिजर्व

पश्चिम बंगाल (West Bengal) के शिक्षक भर्ती घोटाले (SSC recruitment scam) में शुक्रवार को कोलकाता (Kolkata) की एक अदालत ने मुख्य आरोपी पार्थ चटर्जी और उनकी बेहद करीबी साथी अर्पिता मुखर्जी की जमानत पर फैसला सुरक्षित रख लिया.

राज्य सरकार के पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी (Partha Chatterjee) और अर्पिता मुखर्जी (Arpita Mukherjee) को जमानत देने का प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) की टीम ने विरोध किया था. ED अधिकारियों ने कोर्ट को बताया कि अर्पिता की जान को खतरा है, जो उसे जमानत मिलने पर और ज्यादा बढ़ जाएगा.

अर्पिता के खाने की जांच की भी गुहार
ED ने कोर्ट से गुहार लगाई है कि जेल में भी अर्पिता का खाना और पीने का पानी चेक करने के बाद ही परोसा जाए. ED ने इसके लिए कोर्ट से जेल प्रबंधन को ऑर्डर इश्यू करने की मांग की. ED के तरफ से पार्थ चटर्जी को प्रभावशाली व्यक्ति बताते हुए रेस्ट मेमो में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamta Banerjee) के नाम का भी जिक्र किया.

50 बैंक अकाउंट पर हैं ED की नजर
ED के वकील ने कोर्ट को बताया कि अर्पिता के यहां सर्च ऑपरेशन में 50 ऐसे बैंक अकाउंट की जानकारी मिली है, जो संदिग्ध हैं. ED ने कोर्ट से अब तक इस केस में सामने आई कंपनियों और उनके अकाउंट्स के फॉरेंसिक ऑडिट की भी मांग की. ED ने पार्थ और अर्पिता की जेल कस्टडी की मांग करते हुए उनसे जेल में पूछताछ करने की इजाजत मांगी.

पार्थ चटर्जी के वकील ने कहा- सारे दस्तावेज झूठे
इससे पहले विशेष ED अदालत में पार्थ चटर्जी के वकील ने सर्च ऑपरेशन में मिले दस्तावेजों को झूठा बताया. वकील ने कहा कि अर्पिता मुखर्जी के साथ पार्थ चटर्जी की जॉइंट कंपनी आपा यूटिलिटी सर्विस (Aapa Utility Service) का जो दस्तावेज मिला है, वो झूठा है. साथ ही जिन 31 लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी पर नॉमिनी की जगह पार्थ चटर्जी का नाम दिया गया है, वे भी झूठी हैं. पार्थ चटर्जी की कानूनी सलाहकार ने कोर्ट को उनकी जमानत की अर्जी देते हुए कहा कि जरूरत पड़ने पर वह विधायक पद से इस्तीफा भी दे सकते हैं.

रिश्वत देने वाला एक भी व्यक्ति नहीं मिला
पार्थ के वकील ने कहा, न CBI और न ED, किसी को भी इस मामले में एक भी ऐसा व्यक्ति नहीं मिला है, जिसने आगे आकर पार्थ चटर्जी को रिश्वत देने की बात कही है. क्या वे (CBI या ED) ऐसा एक भी गवाह पेश कर सकते हैं, जो कहे कि उससे रिश्वत मांगी गई? पार्थ चटर्जी ने कोई अपराध नहीं किया है और CBI के आरोप उचित नहीं है.