अपनों ने ठुकराया एकनाथ शिंदे ने अपनाया! ‘पुराने शिवसैनिक’ में उम्मीद देखता ठाकरे परिवार

शिवसेना में विधायकों के बाद अब ठाकरे परिवार में भी मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के प्रति भरोसा बढ़ता दिख रहा है। हाल ही के दिनों में देखा गया है कि ठाकरे परिवार के कुछ ऐसे सदस्यों ने शिंदे का रुख किया है, जो कभी चर्चा में रहे, लेकिन अब साइडलाइन हो चुके हैं। इधर, शिंदे भी लगातार कह रहे हैं कि बगावत बालासाहब ठाकरे की विरासत के खिलाफ नहीं, बल्कि दिवंगत संस्थापक के सिद्धांतों को आगे ले जाने के लिए थी।

हाल ही में बाल ठाकरे की बहू स्मिता ठाकरे और पोते निहार ठाकरे ने शिंदे के लिए समर्थन जाहिर किया था। दोनों ने इसे शिष्टाचार बैठक बताया और शिंदे को असली शिवसैनिक करार दिया। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, जब से बालासाहब ने कमान बेटे उद्धव को सौंपी तब से राज ठाकरे, स्मिता और कई अन्य सदस्य अलग-थलग महसूस कर रहे हैं। वहीं, उद्धव भी आदित्य के रूप में अपने उत्तराधिकारी की बात स्पष्ट कर चुके हैं।

परिवार को जानें

बालासाहबके तीन बेटों में बिंदु माधव, जयदेव के बाद उद्धव सबसे छोटे हैं। एक ओर जहां बिंदु माधव की सड़क हादसे में निधन हो चुका है। वहीं, जयदेव राजनीति से दूर हैं। स्मिता, जयदेव की दूसरी पत्नी हैं। हालांकि, दोनों अब अलग हो चुके हैं। इधर, निहार, बिंदु माधव के बेटे हैं, जिनकी शादी भारतीय जनता पार्टी के नेता हर्षवर्धन पाटील की बेटी से हुई है।

इन्हें भी मिल सकती थी कमान

खबर है कि साल 1995 और 2004 के बीच स्मिता और राज को बालासाहब के संभावित उत्तराधिकारी के तौर पर गिना जाता था। जयदेव से अलग होने के बाद भी स्मिता मातोश्री में रह रहीं थीं। उन्हें 1995-99 के बीच शिवसेना-भाजपा की सरकार में काफी ताकतवर माना जाता था।

राज ने भी साल 2005 में अलग होकर महाराष्ट्र नव निर्माण सेना बनाने का फैसला किया। कहा जा रहा है कि साल 2012 में बालासाहब के निधन के बाद ये नेता शांत हो गए थे।

मिलकर क्या बोले ठाकरे परिवार के सदस्य

शिंदे से मिलकर स्मिता ने कहा, ‘एकनाथ शिंदे एक पुराने शिवसैनिक हैं। मैं यहां उन्हें बधाई देने आई हूं। मैं उन्हें और उनके काम को सालों से जानती हूं और यह एक शिष्टाचार बैठक थी।’ वहीं, निहार ने कहा कि उनकी राजनीति में आने की कोई योजना नहीं है, लेकिन वह मानते हैं कि शिंदे बालासाहब की बातों को आगे ले जाएंगे।

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